
कानपुर : बिकरू कांड में पुलिस की परेशानियां फिलहाल कम नहीं हो रही हैं। अब एसआइटी जांच में आरोपित अनाम सीओ पुलिस महकमे के लिए गले की हड्डी बन गया है। लंबी कवायद के बाद जब बृज सिंह का नाम पता चला लेकिन पुलिस मुख्यालय के पास इस नाम के सीओ का कोई रिकार्ड मौजूद नहीं है। ऐसे में सीओ स्तर की जांच लंबी खिंच सकती है। वरिष्ठ आइएएस संजय भूसरेड्डी की अध्यक्षता में गठित एसआइटी ने 11 सीओ और 37 गैर राजपत्रित पुलिसकर्मियों की भूमिका पर सवाल उठाए गए थे। सीओ स्तर के अधिकारियों की जांच एसपी पश्चिम डॉ,अनिल कुमार को मिली थी। इसमें से एक सीओ प्रोन्नत होकर आइपीएस हो चुके हैं। इनके खिलाफ हो रही जांच अब डीआइजी डॉ.प्रीतिंदर सिंह कर रहे हैं, जबकि बाकी बचे दस सीओ स्तर के अधिकारियों में एक का नाम न होकर केवल तैनाती समय का जिक्र था। लंबी छानबीन के बाद बताया गया कि उनका नाम बृज सिंह है। नाम के सत्यापन के लिए फाइल पुलिस मुख्यालय भेजी गई थी।
एसपी पश्चिम ने बताया कि मुख्यालय से उन्हें मौखिक जानकारी दी गई है कि इस नाम से किसी सीओ का रिकार्ड विभाग के पास नहीं है। ऐसे में जांच लटक गई है। गौरतलब है कि उक्त अनाम सीओ से 12 जुलाई 1997 व 24 जुलाई 1997 को विकास दुबे के भाई दीपू दुबे और अविनाश दुबे के शस्त्र लाइसेंस स्वीकृत किए थे। अविनाश दुबे की मृत्यु हो चुकी है।