
इस प्रदर्शनी में मध्य प्रदेश व छत्तीसगढ़ के शिल्पकारो ने अपनी अनोखी शिल्प कला से लोगों को अचंभित किया है। प्रदर्शनी में 60 से ज्यादा स्टॉल्स लगाए गए हैं। प्रदर्शनी में आई मीना लश्करी अपने साथ कपड़े की चिड़िया लाई है।यह चिड़िया जुट के पेड़ों पर चह चाहती नजर आ रही है। प्रदर्शनी में नागालैंड का ड्राई फ्लावर भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इस कलाकृति को लकड़ियों द्वारा बनाया जाता है । लकड़ी को तराश कर फूलों का आकार दिया जाता है। प्रदर्शनी में टेराकोटा की कलाकृतियां भी लोगों को लुभा रही हैं इन कलाकृतियों में कलाकारों ने पुरातन भारतीय कला परंपरा को जीवित रखने का प्रयास किया है। इसके अतिरिक्त मेले में बांस का फर्नीचर, जरदोसी वर्क लेदर की जूतियां, जुट के झूले, लखनवी चिकन, भैरवगढ़ का पिं्रट, नीमच तारापुर का दाबू प्रिंट, चंदेरी साड़ियां, कॉटन के सूट साड़ियां, सिल्क की साड़ियां आदि प्रदर्शित की गई हैं । प्रदर्शनी 19 जनवरी तक चलेगी। कला प्रेमी प्रदेशभर से आए इन कलाकृति को देखने के लिए आमंत्रित हैं ।