
लखनऊ के स्वाद को मिला दुनिया का ताज!
भारत के नवाबों का शहर *लखनऊ* अब दुनिया में अपने स्वाद के लिए मशहूर हो गया है। दुनिया के बड़े सांस्कृतिक संगठन *यूनेस्को (UNESCO)* ने लखनऊ को “*खाने-पीने की रचनात्मक नगरी” यानी *Creative City of Gastronomy का दर्जा दिया है। यह फैसला 31 अक्टूबर 2025 को उज्बेकिस्तान के समरकंद में हुई यूनेस्को की बैठक में लिया गया। इस घोषणा के साथ लखनऊ अब उन चुनिंदा शहरों में शामिल हो गया है, जो अपने अनोखे स्वाद और पाक-परंपरा के लिए पूरी दुनिया में जाने जाते हैं।

प्रधानमंत्री *नरेंद्र मोदी* ने इस उपलब्धि पर बधाई देते हुए कहा कि “लखनऊ भारत की जीवंत संस्कृति का प्रतीक है। यहाँ का खाना हमारी विविधता और रचनात्मकता को दर्शाता है। यह पहचान हर भारतीय के लिए गर्व की बात है।” वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री *अखिलेश यादव* ने कहा कि “यह लखनऊ और उत्तर प्रदेश के लोगों के लिए गौरव का पल है, अब लखनऊ का खाना दुनिया के नक्शे पर अपनी चमक बिखेर रहा है।” प्रदेश के पर्यटन मंत्री ने भी कहा कि यह सम्मान लखनऊ में *खाद्य पर्यटन (फूड टूरिज़्म)* को बढ़ावा देगा और स्थानीय रसोइयों व व्यापारियों को नए अवसर देगा।
लखनऊ का खाना अपनी *नवाबी तहज़ीब और नफ़ासत* के लिए जाना जाता है। यहाँ के *गलौटी कबाब, **टुंडे कबाबी, **अवधी बिरयानी, मक्खन मलाई, और **टोकरी चाट* जैसे व्यंजन दुनिया भर में पसंद किए जाते हैं। लखनऊ की गलियों की खुशबूदार रसोइयाँ और स्वाद भरे व्यंजन उसकी पहचान बन चुके हैं। यहाँ का खाना सिर्फ पेट भरने का ज़रिया नहीं बल्कि एक *कला, संस्कृति और इतिहास* का हिस्सा है, जहाँ हर स्वाद में तहज़ीब और मोहब्बत झलकती है।

अब यूनेस्को की इस पहचान के बाद लखनऊ दुनिया के *खाने के नक्शे* पर और मज़बूती से उभरेगा। विदेशी सैलानियों की संख्या बढ़ेगी, और शहर को नई आर्थिक और सांस्कृतिक पहचान मिलेगी। सरकार “*ज़ायका-ए-लखनऊ*” नाम से फूड फेस्टिवल शुरू करने की तैयारी में है, ताकि स्थानीय स्वाद और परंपरा को दुनिया तक पहुँचाया जा सके।
आज लखनऊ ने साबित कर दिया है कि वह सिर्फ *नवाबों और तहज़ीब* का शहर नहीं, बल्कि *स्वाद और संस्कृति* का केंद्र भी है। यहाँ का हर निवाला इतिहास और अपनापन दोनों का एहसास कराता है, और अब इस स्वाद को पूरी दुनिया ने सलाम किया है।