
नतीजों से पहले चैनलों का सुर बदलने लगा!
बिहार चुनाव 2025: बिहार चुनाव 2025 के नतीजों की घोषणा से पहले ही राजनीतिक और मीडिया परिदृश्य में खासी हलचल दिख रही है। पिछले कुछ दिनों में कई प्रमुख टीवी चैनलों और न्यूज़ पोर्टल्स का टोन अचानक *तेजस्वी यादव और महागठबंधन के पक्ष में* नजर आने लगा है। राजनीतिक विश्लेषक इसे “सियासी हवा में बदलाव” और जनता की प्राथमिकताओं का संकेत मान रहे हैं।

विशेषज्ञों के मुताबिक, इस बदलाव के पीछे कई कारण हैं। पहला, *एग्जिट पोल और सोशल मीडिया रुझान* तेजस्वी के पक्ष में जा रहे हैं। विभिन्न सर्वे और सोशल मीडिया ट्रेंड से संकेत मिल रहे हैं कि बिहार के युवा और ग्रामीण मतदाता *राहुल गांधी-तेजस्वी गठबंधन* के वोट बैंक की तरफ झुक रहे हैं। इसे देखते हुए कई मीडिया हाउस अब कवरेज में संतुलित या हल्का सकारात्मक रुख अपना रहे हैं।
दूसरा कारण है *बीजेपी और एनडीए के खिलाफ बढ़ती नकारात्मक छवि*। पिछले हफ्तों में कई चैनलों ने अपने स्टिंग और रिपोर्ट्स में कथित सरकारी गलतियों, विकास के मुद्दों पर देरी और भ्रष्टाचार के आरोपों को प्रमुखता से उठाया। जबकि महागठबंधन के कार्यक्रम और जनता संवाद को अब अधिक कवरेज मिल रहा है।
तीसरा और बड़ा कारण है *राजनीतिक रणनीति और एंट्री*। मीडिया हाउस अपने दर्शक आधार और रेटिंग के हिसाब से बहुप्रचारित एजेंडा तैयार करते हैं। बिहार में युवा मतदाता और सोशल मीडिया पर सक्रिय लोग तेजस्वी यादव के पक्ष में ज्यादा नजर आ रहे हैं, इसलिए चैनलों के कंटेंट में भी यह झुकाव देखा जा रहा है।
कुछ पत्रकार और विश्लेषक इसे सिर्फ *एग्जिट पोल के असर* के रूप में भी देख रहे हैं। अक्सर बड़े चुनावों में नतीजों से पहले मीडिया हाउस जनता की भावना को परखने और ट्रेंड बनाने की कोशिश करते हैं। ऐसे में तेजस्वी यादव के पक्ष में कवरेज का बढ़ना सिर्फ चुनावी रणनीति और दर्शकों की प्रतिक्रिया का परिणाम हो सकता है।
हालांकि, विपक्षी दलों और एनडीए समर्थकों ने मीडिया पर *पूर्वाग्रह का आरोप* लगाया है। उनका कहना है कि कई चैनलों ने बिना तथ्यों की पुष्टि किए महागठबंधन की छवि चमकाने का काम किया। वहीं राजनीतिक विशेषज्ञ कहते हैं कि नतीजे आने तक मीडिया का सुर कई बार बदलता रहता है, और यह किसी भी पक्ष की जीत की गारंटी नहीं है।
इस बीच बिहार की सियासत अब नतीजों के अंतिम चरण में पहुँच चुकी है। जनता की आखिरी पसंद और चैनलों के बदलते ट्रेंड्स दोनों ही मिलकर *राजनीतिक माहौल* को नया रूप दे रहे हैं। तेजस्वी यादव और महागठबंधन के पक्ष में बढ़ती हवा यह दिखा रही है कि चुनाव नतीजे आने तक *सियासी टेंशन और चर्चा दोनों चरम पर* रहेंगे।