
CM कुर्सी: बीजेपी–JDU में सिर-फुटव्वल!
इंडिया Live: बिहार की राजनीति इन दिनों फिर से गरम है। मुद्दा वही पुराना, लेकिन लड़ाई नई—*मुख्यमंत्री की कुर्सी*। बीजेपी और जनता दल यूनाइटेड (JDU) के बीच इस समय ऐसा माहौल है मानो दोनों पार्टियों में अंदर ही अंदर एक खींचतान चल रही है। बाहर से सब ठीक-ठाक दिखाने की कोशिश हो रही है, लेकिन अंदर से हालात कुछ और ही कहते हैं। सवाल यह है कि आखिर यह टेंशन क्यों बढ़ रही है? और इस बीच तेजस्वी यादव की चुप्पी का क्या मतलब है?

सबसे पहले बात करते हैं *बीजेपी और JDU की टक्कर* की। दोनों मिलकर सरकार चला रहे हैं, लेकिन सत्ता और फैसलों पर किसका कितना कंट्रोल हो—इस पर तनाव बढ़ता जा रहा है। बीजेपी चाहती है कि सरकार में उनकी भूमिका मजबूत दिखे। दूसरी तरफ, JDU और खुद नीतीश कुमार नहीं चाहते कि उनकी पार्टी और उनका पद सिर्फ नाम का रह जाए। CM कुर्सी पर असली ताकत किसकी है—यही बात लड़ाई की जड़ बन गई है। कई बार ऐसा लगता है कि दोनों पार्टियों में भरोसा कम और शक ज्यादा है। यह सिर-फुटव्वल धीरे-धीरे खुलकर सामने आ रही है।
अब आते हैं *तेजस्वी यादव* पर। राजनीति का खेल चल रहा है, लेकिन तेजस्वी पूरी तरह चुप हैं। न कोई बड़ा बयान, न कोई खुली टिप्पणी। इस चुप्पी ने हर किसी को सोचने पर मजबूर कर दिया है। क्या तेजस्वी इंतज़ार कर रहे हैं कि बीजेपी और JDU आपस में भिड़ें और वह मौके का फायदा उठाएँ? या फिर वह अपनी रणनीति शांत माहौल में बना रहे हैं ताकि सही वक्त पर बड़ी चाल चली जा सके? विरोधी पार्टियाँ उनकी चुप्पी को कमजोरी बता रही हैं, लेकिन उनके समर्थक कहते हैं कि “चुप्पी ही सबसे बड़ा हथियार होती है”—क्योंकि इससे विरोधियों को अंदाज़ा नहीं होता कि अगला कदम क्या होगा।
और अब बात उस अजीब लेकिन रोचक सवाल की—*क्या नेता खेसारी लाल यादव से सबक लेंगे?*
खेसारी लाल यादव का नाम अक्सर राजनीति में इसलिए आता है क्योंकि वे जनता की नब्ज़ पहचानते हैं। उनका एक बयान, एक वीडियो, एक गाना—सीधे लोगों के बीच उतर जाता है। उनकी बोलने की शैली जनता को तुरंत समझ आती है। वह मुद्दे को जटिल नहीं बनाते, सीधे और सादे तरीके से बात कहते हैं। यही वजह है कि कई नेता सोचते हैं कि वे भी खेसारी की तरह आम भाषा, आम मुद्दे और सीधी बात करें ताकि जनता से जुड़ाव बने। सवाल यह उठ रहा है कि क्या बिहार के नेता यह समझेंगे कि जनता को बड़े-बड़े भाषण नहीं, साफ और ईमानदार बात चाहिए?
कुल मिलाकर, बिहार की राजनीति इस समय कई दिशाओं में जा रही है। एक तरफ बीजेपी और JDU के बीच खींचतान है, दूसरी तरफ तेजस्वी यादव खामोश रहकर सब देख रहे हैं, और तीसरी तरफ जनता यह सोच रही है कि कौन नेता उनकी भाषा, उनकी मुश्किलें और उनकी उम्मीदों को सही मायने में समझता है। आने वाले दिनों में राजनीतिक खेल और तेज़ होगा, और तब साफ पता चलेगा कि कौन नेता कौन-सा सबक सीख पाया है—और कौन फिर वही पुरानी गलती दोहराएगा।