
लखनऊ में सपा विधायक सुधाकर सिंह का निधन।
लखनऊ: मेदांता अस्पताल में ली अंतिम सांस। मल्टी ऑर्गन फैलियर के चलते निधन।कई दिनों से वेंटिलेटर सपोर्ट पर थे। घोसी उपचुनाव में सुधाकर ने जीता था चुनाव।सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव मेदांता पहुंचे।

अखिलेश यादव ने निधन पर दुख व्यक्त किया। मेदांता अस्पताल में शिवपाल यादव मौजूद।
अखिलेश यादव की भावुक प्रतिक्रिया
जब समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को यह दुखद सूचना मिली, तो वे तुरंत मेदांता अस्पताल पहुंचे। अस्पताल के अंदर वे सीधे परिवार तक गए और सभी को ढांढस बंधाया। बताया जाता है कि परिवार के कई सदस्य रो रहे थे और पूरे माहौल में गहरा दुख पसरा हुआ था। अखिलेश यादव ने उनसे कहा कि पार्टी उनके परिवार के साथ हर कदम पर खड़ी है। बाहर निकलते समय अखिलेश यादव भी काफी भावुक नजर आए।
अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर भी श्रद्धांजलि देते हुए लिखा कि सुधाकर सिंह का निधन समाजवादी आंदोलन के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने कहा कि सुधाकर सिंह न सिर्फ एक मजबूत नेता थे, बल्कि जनता के सच्चे सेवक भी थे।
कौन थे सुधाकर सिंह?
सुधाकर सिंह का नाम पूर्वांचल की राजनीति में बेहद सम्मानित माना जाता था। वे अपने क्षेत्र में “शेर-ए-घोसी” नाम से मशहूर थे। कारण था—उनकी बेबाकी, जनता से सीधा संवाद, और मुद्दों पर खुलकर आवाज उठाना।
उन्होंने 2023 के घोसी उपचुनाव में बीजेपी के बड़े नेता दारा सिंह चौहान को हराकर सपा के लिए बड़ी जीत दर्ज की थी। इस जीत ने उन्हें राज्य की राजनीति में और मजबूत स्थान दिलाया।
सुधाकर सिंह की लोकप्रियता इतनी मजबूत थी कि लोग उन्हें अपने घर का सदस्य मानते थे। गाँव-गाँव में उनका स्वागत उसी तरह होता था जैसे कोई अपना बड़ा भाई या बड़ा नेता आया हो। वे अक्सर बिना सिक्योरिटी, बिना किसी दिखावे के लोगों के बीच पहुँच जाते थे और छोटी से छोटी समस्या खुद सुनते थे।
बीमारी और अंतिम समय
पिछले कुछ महीनों से वे स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे। कई बार उनकी तबीयत बिगड़ने पर वे अस्पताल में भर्ती भी हुए थे। बताया जाता है कि अंतिम बार तबीयत अचानक खराब तब हुई जब वे अपने एक परिचित के समारोह से लौट रहे थे। रास्ते में उन्हें बेचैनी महसूस हुई और फिर उन्हें तुरंत लखनऊ लाया गया। डॉक्टरों ने काफी कोशिश की लेकिन हालत बिगड़ती चली गई।
परिवार और समर्थकों में मातम
उनके निधन की खबर मिलते ही परिवार में चीख-पुकार मच गई। उनके बेटे और परिवार के अन्य सदस्यों ने बताया कि सुधाकर सिंह अंतिम समय तक जनता और अपने इलाके की बातें करते रहते थे।
घोसी में जैसे ही खबर पहुँची, बाजार बंद होने लगे, लोगों ने अपने घरों में दीप बुझा दिए और सड़कों पर शोक का माहौल बन गया। बुजुर्ग, युवा, महिलाएँ—सबके चेहरे उदासी से भरे हुए थे। कई लोग कह रहे थे कि “आज घोसी ने अपना बड़ा बेटा खो दिया।”
राजनीतिक और सामाजिक असर
सुधाकर सिंह सिर्फ एक MLA नहीं थे, बल्कि जनता की आवाज थे। वे अक्सर विधानसभा में ग्रामीण-विकास, किसानों की समस्या, नौजवानों के रोजगार और गरीबों के मुद्दों को जोर-शोर से रखते थे।
उनके निधन से सपा को बड़ा झटका लगा है क्योंकि वे पूर्वांचल में पार्टी का मजबूत चेहरा थे।
बीजेपी, बसपा और कांग्रेस के नेताओं ने भी उनकी मौत पर दुख जताया है और कहा है कि राजनीति ने आज एक सच्चा