
आजम खान के खिलाफ बड़ा खेल!
उत्तर प्रदेश Live: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल मच गई है। सीनियर नेता और पूर्व मंत्री *आजम खान* से जुड़े एक महत्वपूर्ण मुकदमे में उस समय बड़ा ट्विस्ट आ गया, जब मामले की सुनवाई कर रहे *जज ने खुद को केस से अलग कर लिया। इस फैसले ने राजनीतिक गलियारों से लेकर कानूनी विशेषज्ञों तक सभी को चौंका दिया है। अब सवाल ये उठ रहा है कि **आखिर जज पीछे क्यों हटे?* क्या यह केवल कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है, या इसके पीछे कोई “बड़ा खेल” चल रहा है?
मामले की जानकारी के मुताबिक, जज ने इस केस की सुनवाई से हटते समय कुछ विशेष परिस्थितियों का जिक्र किया। हालांकि उन्होंने विस्तृत कारण सार्वजनिक नहीं किया, लेकिन कोर्ट में मौजूद सूत्रों का कहना है कि जज ने “व्यक्तिगत कारणों” की बात कही और इस संवेदनशील केस से दूरी बना ली।
ऐसे मामलों में जज का हटना कोई नई बात नहीं है, लेकिन जब आरोपी बड़ा नेता हो और मामला राजनीतिक रूप से संवेदनशील हो, तब ये कदम कई सवाल खड़े करता है।
आजम खान पर कई तरह के मुकदमे दर्ज हैं—जमीन कब्जे से लेकर शैक्षणिक संस्थानों से जुड़े विवादों तक। जिस केस से जज हटे हैं, वो भी आजम खान के लिए बेहद अहम माना जा रहा था। इस मुकदमे की सुनवाई में पहले ही कई बार तारीखें बदल चुकी हैं, जिससे विपक्ष बार-बार सवाल उठाता रहा है कि “क्या आजम के मामलों में जानबूझकर देरी की जा रही है?”
जज के इस कदम के बाद विपक्षी दलों ने तुरंत प्रतिक्रिया दी। कई नेताओं ने कहा कि
*“जब भी आजम खान के मामले कोर्ट में आते हैं, कुछ न कुछ होता ही है। यह सिर्फ कानूनी वजह नहीं लगती।”*
दूसरी तरफ कुछ राजनीतिक जानकार मानते हैं कि मामला बेहद संवेदनशील है, और जज शायद किसी तरह के विवाद से बचना चाहते हों। यह भी संभव है कि केस से जुड़े दस्तावेज या परिस्थितियां किसी नए जज के मूल्यांकन की मांग कर रही हों।
कई कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी जज को कोई भी केस छोड़ने का अधिकार होता है, अगर उन्हें लगता है कि वे केस को निष्पक्षता से नहीं सुन पाएंगे या किसी कारण से हितों का टकराव हो सकता है।
लेकिन जनता और मीडिया में यही सवाल उठ रहा है कि *यह फैसला ठीक उसी समय क्यों आया, जब केस अहम मोड़ पर पहुंचने वाला था?*
जज के हटने के बाद अब इस केस की सुनवाई नए जज के पास जाएगी। इससे पूरे मामले में कुछ समय और लग सकता है। यह देरी आजम खान के लिए राहत भी हो सकती है और चिंता भी, क्योंकि हर देरी अगले फैसले को प्रभावित कर सकती है। कई लोग इसे “समय लेने की रणनीति” भी बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे महज संयोग मानते हैं।
आजम खान ने इस मुद्दे पर सीधा बयान तो नहीं दिया, लेकिन उनके करीबी नेताओं ने कहा कि
“हम कानून पर भरोसा करते हैं, और चाहेंगे कि केस जल्द से जल्द निपटे।”**
वहीं, उनके समर्थकों का कहना है कि लगातार मुकदमों और बार-बार की सुनवाईयों से आजम खान को राजनीति से दूर रखने की कोशिश हो रही है।
मामला अब नए जज के पास जाएगा और सुनवाई फिर से शुरू होगी। देखना यह है कि नया जज केस को किस दिशा में ले जाता है और क्या इस बार सुनवाई बिना किसी विवाद के आगे बढ़ पाएगी।
लेकिन इतना तय है कि *आजम खान से जुड़े इस केस में जज के हटने ने नए सवाल खड़े कर दिए हैं*। राजनीतिक माहौल में यह मुद्दा आने वाले दिनों में और गरमाने वाला है।