
वंदे मातरम विवाद पर केशव मौर्य का पलटवार, बोले– यह गीत नहीं आज़ादी का मंत्र है
उत्तर प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान वंदे मातरम को लेकर शुरू हुई सियासी बहस अब और तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा उठाए गए सवालों पर उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वंदे मातरम केवल एक गीत नहीं, बल्कि वह महान मंत्र है, जिसने भारत की आज़ादी की नींव रखी।
वंदे मातरम पर टिप्पणी का अधिकार नहीं – केशव मौर्य
मीडिया से बातचीत में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अखिलेश यादव को वंदे मातरम जैसे पवित्र मंत्र पर टिप्पणी करने या उपदेश देने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम वह मंत्र है, जिसके जयघोष मात्र से अंग्रेज़ी हुकूमत थर-थर कांपती थी और भारत छोड़ने को मजबूर हुई।
उन्होंने आगे कहा कि यही मंत्र आज विकसित भारत के संकल्प को मजबूती देगा। इससे किसान समृद्ध होंगे, महिलाएं सशक्त बनेंगी और युवाओं का भविष्य उज्ज्वल होगा। मौर्य ने इसे राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा करार दिया।
सरकार की ओर से सुरेश खन्ना ने संभाला मोर्चा
सरकार की ओर से संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने भी वंदे मातरम के गौरवशाली इतिहास को सदन के बाहर याद किया। उन्होंने कहा कि भारत के स्वतंत्रता सेनानियों ने फांसी के फंदे को चूमते समय भी वंदे मातरम का जयघोष किया था। यह गीत भारत माता के प्रति सम्मान और बलिदान का प्रतीक है।
सुरेश खन्ना ने कहा कि अब अन्य राज्यों ने भी वंदे मातरम को अपनाया है, क्योंकि यह राष्ट्रीय एकता और गौरव का प्रतीक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस विषय पर विधानसभा में नियमों के तहत चर्चा जरूर होगी।
विपक्ष को अनुशासन की नसीहत
डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने विपक्ष को नसीहत देते हुए कहा कि सरकार ने विधानसभा के नियमों और परंपराओं के अनुरूप ही निर्णय लिया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि चर्चा के दौरान विपक्ष लोकतांत्रिक मर्यादा और अनुशासन बनाए रखेगा, ताकि सदन की गरिमा बनी रहे।
वंदे मातरम को लेकर यह बहस अब केवल राजनीतिक नहीं रह गई है, बल्कि यह राष्ट्रवाद, इतिहास और संवैधानिक मूल्यों से जुड़ा विषय बन गई है, जिस पर आने वाले दिनों में सदन के भीतर और बाहर चर्चा और तेज होने के आसार हैं।
