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America vs Iran: कौन ज़्यादा खतरनाक?

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America vs Iran: कौन ज़्यादा खतरनाक?

IRAN vs AMERICA: ईरान इस समय अपने इतिहास के सबसे नाज़ुक और खतरनाक दौर से गुजर रहा है। देशभर में चल रहे विरोध प्रदर्शनों ने पूरे सिस्टम को हिला कर रख दिया है। अलग-अलग रिपोर्टों के मुताबिक अब तक 500 से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें सैकड़ों प्रदर्शनकारी और कई सुरक्षाकर्मी शामिल हैं, जबकि 10,000 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। ईरान के बड़े शहरों—तेहरान, मशहद, इस्फहान, शिराज़—सभी जगह लाखों लोग सड़कों पर उतर आए हैं। महिलाएँ, छात्र, युवा और आम नागरिक खुलकर सरकार के खिलाफ नारे लगा रहे हैं। हालात इतने बेकाबू हो चुके हैं कि  इंटरनेट बंद कर दिया गया है, सेना और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की तैनाती बढ़ा दी गई है और हर तरफ डर का माहौल है। प्रदर्शनकारियों का साफ कहना है कि अब यह सिर्फ सुधार की मांग नहीं है, बल्कि सरकार और सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की नीतियों के खिलाफ खुली बगावत है।

इसी बीच इस आंतरिक संकट में अमेरिका की एंट्री ने हालात को और ज़्यादा विस्फोटक बना दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को खुली चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर ईरान में प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाई गई, तो अमेरिका ऐसा जवाब देगा जहाँ ईरान को सबसे ज़्यादा दर्द होगा। इस बयान के बाद पूरी दुनिया में हलचल मच गई है, क्योंकि इतिहास गवाह है कि जब अमेरिका इस तरह की भाषा इस्तेमाल करता है, तो मामला सिर्फ चेतावनी तक सीमित नहीं रहता। अब सवाल यह उठता है कि अगर अमेरिका और ईरान आमने-सामने आते हैं, तो ताक़त के मामले में कौन किस पर भारी पड़ेगा?

अगर सिर्फ सैन्य ताक़त की बात करें, तो अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी मिलिट्री पावर है। अमेरिका का रक्षा बजट पूरी दुनिया में सबसे ज़्यादा है, उसके पास अत्याधुनिक फाइटर जेट्स, स्टेल्थ बॉम्बर्स, एयरक्राफ्ट कैरियर, परमाणु पनडुब्बियाँ और हाई-टेक मिसाइल डिफेंस सिस्टम हैं। अमेरिका के पास दुनिया भर में सैकड़ों सैन्य अड्डे हैं और मध्य-पूर्व में भी उसकी मौजूदगी बहुत मजबूत है। सीधे युद्ध की स्थिति में अमेरिका की एयर पावर और टेक्नोलॉजी ईरान से कहीं आगे मानी जाती है।

लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। ईरान की ताक़त उसकी रणनीति और मिसाइल क्षमता में छुपी है। ईरान के पास हजारों बैलिस्टिक और क्रूज़ मिसाइलें बताई जाती हैं, जिनमें से कई की रेंज 2,000 किलोमीटर से ज्यादा है। ईरान के कुछ एडवांस मिसाइल सिस्टम इतने तेज़ हैं कि उनकी रफ्तार 17,000 किलोमीटर प्रति घंटा तक बताई जाती है, जिससे उन्हें रोकना बेहद मुश्किल हो जाता है। यही मिसाइलें इजरायल, सऊदी अरब, अमेरिका के मिडिल-ईस्ट बेस और खाड़ी देशों को सीधे निशाने पर ले सकती हैं। इसके अलावा ईरान की सबसे बड़ी ताक़त उसके प्रॉक्सी ग्रुप्स हैं—हिज़्बुल्लाह, हूती विद्रोही, इराक और सीरिया में मौजूद मिलिशिया—जो अलग-अलग मोर्चों से हमला कर सकते हैं। इसका मतलब यह है कि अगर युद्ध हुआ, तो वह सिर्फ ईरान और अमेरिका तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरा मध्य-पूर्व आग में झुलस सकता है।

ईरान यह भी साफ कर चुका है कि अगर उस पर हमला हुआ, तो वह सीधे और अप्रत्यक्ष दोनों तरीकों से जवाब देगा। स्ट्रेट ऑफ होरमुज़, जहाँ से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल गुजरता है, उसे बंद करने की धमकी भी ईरान पहले दे चुका है। अगर ऐसा हुआ, तो सिर्फ युद्ध ही नहीं, बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था हिल सकती है। वहीं इजरायल, खाड़ी देश और यूरोप इस पूरे हालात पर बेहद सतर्क नज़र बनाए हुए हैं, क्योंकि किसी भी पल एक चिंगारी पूरे इलाके को युद्ध में झोंक सकती है।

इसलिए आज स्थिति ऐसी है कि अमेरिका भले ही सैन्य ताक़त में सबसे आगे हो, लेकिन ईरान को कमजोर समझना बहुत बड़ी भूल होगी। ईरान की मिसाइलें, उसका क्षेत्रीय प्रभाव, और अंदर से उबलती जनता—ये तीनों मिलकर हालात को बेहद खतरनाक बना रहे हैं। पूरी दुनिया की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि ईरान के अंदर चल रहा यह विरोध प्रदर्शन किस मोड़ पर जाकर रुकेगा—क्या बातचीत और सुधार की ओर, या

फिर अमेरिका-ईरान टकराव और एक बड़े युद्ध की ओर। क्योंकि अगर यह टकराव युद्ध में बदला, तो उसका असर सिर्फ दो देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया को उसकी कीमत चुकानी पड़ सकती है

ईरान एक घायल शेर है जो अमेरिका को झपटने को तैयार है!

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