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धान की बिक्री को लेकर अन्नदाता बेहाल

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नहीं बिकेगा धान का दाना तो कैसे घर आएगा गेहूं का दाना: किसान

बछरावां रायबरेली :  जहां एक ओर केंद्र सरकार व प्रदेश सरकार निरंतर किसानों की आय दोगुनी करने की बात कर रही है। वहीं दूसरी ओर धान की सस्ती कीमतों को लेकर विकास क्षेत्र का अन्नदाता खून के आंसू बहा रहा है। जानकारी के अनुसार आपको बताते चलें कि धान की फसल का समर्थन मूल्य तो 1868 प्रति कुंटल रुपये है, परंतु बिचौलियो के कारण किसान को अपनी फसल का समर्थन मूल्य नहीं मिल पा रहा है, साथ ही साथ आपको यह भी बताते चलें कि बछरावां और महाराजगंज के बीच में किसी भी प्रकार का सरकारी धान केंद्र न होने के कारण क्षेत्र के किसानों को मजबूरी में अपनी फसल को बिचौलियों के हाथ बेचना पड़ रहा है। गेहूं की बुवाई चरम पर है इसलिए किसान धान की फसल को बेचने के लिए बेबस है। इस मौके पर जब संवाददाता ने विकास क्षेत्र के रामपुर के समोधा ग्राम पंचायत के किसान अविनाश चंद्र बाजपेई बातचीत की तो उन्होंने बताया कि सरकार ने धान का समर्थन मूल्य 1868 रुपए कर रखा है

लेकिन धान केंद्रों पर धान ना लिए जाने के कारण हम लोगों को बाहर ही धान बेचना पड़ता है जिसके लिए सरकारी समर्थन मूल्य से बहुत ही कम पैसे में संतोष करना पड़ता है। साथ ही साथ उन्होंने यह भी बताया कि जहां एक ओर धान के समर्थन मूल्य से कम मूल्य पर धान को बेचना पड़ता है वहीं दूसरी ओर 50 किलो की खाद की बोरी हमें ₹1200/ में मिल रही है जबकि एक कुंतल धान की कीमत 12 सो रुपए ही प्राप्त हो रही है और डीजल के दामों में वृद्धि होने के कारण हमको जुताई भी अधिक मात्रा में देनी पड़ती है। हम किसान भाइयों की सरकार से यही गुहार है कि डीजल के दामों में कमी की जाए और हमारे धान का समर्थन मूल्य हमें दिया जाए।

वही दूसरे किसान सुरेंद्र कुमार मिश्रा ने बताया कि धान केंद्रों पर केवल बौनी धान ही लिया जाता है उसमें भी दो किस्म के धान होते हैं। एक सफेद तो दूसरा लाल केवल लाल धान ही खरीदा जाता है ऐसे में हम लोगों ने जो दूसरे किस्म के धान लगा रखे हैं जैसे मोती ,सोनम, दामिनी ,जय श्री, राम,1121 इस किस्म के दानों को हमें बिचौलियों के हाथ सस्ते दामों में बेचना पड़ता है। उन्होंने किसानों की दुर्दशा को व्यक्त करते हुए प्रदेश के मुखिया महंत योगी आदित्यनाथ से गुहार लगाई है की हम किसान भाइयों पर रहम करते हुए हमारी समस्या का निराकरण किया जाए।

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