
रामनगर, बाराबंकी : पीला इंटा, घटिया व हल्के पल्ले से लेकर मौरंग, सीमेंट का मिश्रण भी मानक के अनुसार नही लग रहा। प्रधान भी कह रहे कि कमीशन के चक्कर मे वे कैसे गुडवत्तापरक शौचालय का निर्माण करें। इन शौचालयों के निर्माण कार्य शुरू होने से पहले तकनीकी स्वीकृति के नाम पर भी प्रधानों को हजारों खर्च करने पड़े थे। प्रधानों से दस से पन्द्रह हजार रुपए टीएस कराने के नाम पर वसूल किए गए। प्रधान पैसा देने के बाद चुप ही रहे क्योंकि उन्हें अपना आगे कार्य भी देखना था। रामनगर ब्लॉक के 76 गांवों में सामुदायिक शौचालय बन रहे हैं जिनकी लागत करीब पांच लाख की है। अभी दो दर्जन में स्लेप पड़ा है बाकी छत स्तर तक हुए है। अभी पिछले महीने डीपीआरओ ने रोटी गांव के शौचालय का निरीक्षण किया था जिसकी गुडवत्ता खराब मिली थी।वे कार्यवाही करने के मूड में थे किन्तु चर्चा है कि किसी तरह ले दे कर मामले को निपटाया गया।
पंचायत बिभाग के सचिव का इन शौचालयों में भुगतान के समय कमीशन फिक्स बताया जा रहा है। कमीशन खोरी ने इनकीं गुडवत्ता प्रभावित कर दी है। दबी जुबान से प्रधान कहते दिखते हैं कि कमीशन दें या सही काम करें।यही हाल पंचायत भवन निर्माण का हो रहा है। कमीशन के चलते प्रधान बनवाने से कतरा रहे हैं।