diwali horizontal

हज़रत ज़हरा की शहादत इस्लाम की दुनिया के लिए प्रतिबिंब का क्षण: मौलाना सय्यद हैदर अब्बास

0 192

सिरसी : हज़रत मोहम्मद साहब स० की बेटी हज़रत फ़ातिमा ज़हरा अ० की शहादत के अवसर पर अज़ाए फातमी का मनाना आज भी पूरी दुनिया को निमंत्रण देता है कि देखो किस तरह से हज़रत फ़ातिमा ज़हरा को केवल अठारह वर्ष की आयु में असा लेकर चलना पड़ रहा था। अज़ाए फ़ातिमी के के अवसर पर अलहाज नक़ी ज़ैदी ने इस वर्ष भी खमसाए मजालिस का आयोजन किया है।मौलाना सय्यद हैदर अब्बास ने मजलिस को संबोधित करते हुए उन्होंने हदीस के आलोक में शब-ए-कद्र और फातिमा ज़हरा स० के बीच समानता का उल्लेख किया।

मौलाना सय्यद हैदर अब्बास ने अपने बयान में कहा कि पवित्र कुरआन ने हज़रत मरियम की लगभग सभी विशेषताओं का वर्णन किया है जो हज़रत मोहम्मद साहब की बेटी हज़रत फातिमा ज़हरा जो जनाबे मरयम से श्रेष्ठता रखती हैं जैसे जनाबे मरयम का समय जहिलियत में आना जबकि जनाबे ज़हरा इस्लाम के युग में आई, जनाबे मरयम अपने समय की महिलाओं की सरदार थी जबकि जनाबे ज़हरा पूरी दुनिया की महिलाओं की सरदार हैं।

पैगंबर की पीढ़ी का अस्तित्व जनाबे ज़हरा के कारण है जबकि जनाबे मरयम अरब की मालिक जनाबे खदीजा की सेवा करने आई थीं, जनाबे मरयम के पास कोई दिव्य ग्रंथ नहीं है जबकि मुसहफे फातिमा मौजूद हैं। जनाबे मरयम का नाम उनकी मां ने रखा था जबकि जनाबे फातिमा का नाम अल्लाह ने चुना है।जनाबे मरियम मलकुल मौत को देखकर बेहोश हो गईं जबकि जनाबे ज़हरा मौत के समय खुश थीं। मौलाना सय्यद हैदर अब्बास ने पवित्र कुरआन की आयतों के संदर्भ में जनाबे फातिमा की महानता और गुणों को प्रस्तुत किया और साथ ही कहा कि वर्तमान युग में हमारी पहली ज़िम्मेदारी निर्दोष व्यक्तियों को अपना आदर्श बनाना है।

Leave A Reply

Your email address will not be published.