
कहा, क्या किसी अपराधी के साथ शादी कर लेने मात्र से किसी युवती को अपराधी ठहराया जा सकता है
लखनऊ : पिछले दो महीने से जेल में बंद बिकरू कांड में मारे गए अपराधी अमर दुबे की नवविवाहिता खुशी दुबे के लिए कांग्रेस विधान मंडल दल की नेता आराधना मिश्रा मोना ने आवाज उठाई है। कांग्रेस नेता ने कहा कि क्या किसी अपराधी के साथ शादी कर लेने मात्र से किसी युवती को अपराधी ठहराया जा सकता है? बिकरू कांड के बाद पुलिस एनकाउंटर में मारे गए अमर दुबे और खुशी दुबे की शादी दो दिन पूर्व ही हुई थी। लेकिन उत्तर प्रदेश पुलिस ने अमर दुबे को मारने के बाद खुशी को भी प्रताडित किया
उस पर एनएसए और गैंगस्टर लगाकर जेल भेज दिया। मोना ने सरकार और पुलिस से सवाल करते हुए कहा, क्या खुशी दुबे का यह कसूर है कि दो दिन पहले उसने अमर दुबे के साथ शादी कर ली थी? या फिर उसका यह कसूर है वह एक गरीब ब्राह्मण की बेटी है? कांग्रेस विधायक दल की नेता ने बुधवार को एक बयान जारी कर कहा, उत्तर प्रदेश की वर्तमान भाजपा सरकार में पुलिस निरंकुश हो चुकी है। वह जनता पर अत्याचार कर रही है। आराधना मिश्रा ने कहा कि खुशी के हाथों की मेंहदी का रंग भी फीका नहीं पड़ा था और उसकी मांग सूनी हो गई
कोर्ट ने खुशी को नाबालिग करार दिया
कांग्रेस विधायक ने कहा, बिकरू कांड के बाद खुशी के परिजन और वकील चिल्ला-चिल्ला कर कहते रहे कि उनकी बेटी नाबालिग है। लेकिन किसी ने उनकी बात नहीं सुनी। उस पर रासुका और गैंगस्टर की कार्रवाई की गयी। अब सभी चिकित्सकीय रिपोर्ट आने के बाद कोर्ट ने खुशी को नाबालिग माना है
क्या यही है ‘बेटी बचाओं- बेटी पढ़ाओ’ नारे की असलियत
आराधना मिश्रा ने योगी सरकार पर हमला करते हुए कहा, ‘बेटी बचाओं- बेटी पढ़ाओ’ का नारा देने वाली भाजपा सरकार में एक गरीब ब्राह्मण की बेटी के साथ पुलिस ज्यादती कर रही है, उसके साथ अव्यवहार किया जा रहा है। निर्दोष होते हुए उसे जेल भेज दिया गया। क्या यही भाजपा के बेटी बचाओ- बेटी पढ़ाओ के नारे की असलियत है? कांग्रेस नेता ने कहा कि आजाद भारत के इतिहास में शायद ही पुलिस प्रताड़ना की ऐसी कोई दूसरी मिशाल मिले
महिला आयोग, बाल आयोग मामले का लें संज्ञान
कांगे्रस विधान मण्डल दल की नेता ने महिला आयोग, बाल आयोग एवं मानवाधिकार आयोग से इस प्रकरण का स्वतः संज्ञान लेने का अनुरोध किया। कहा कि इस प्रकरण की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच होनी चाहिए। जो भी इसमें दोषी हो उनके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए
क्योंकि खुशी का जीवन तो वैसे ही बर्बाद हो चुका है, अब उसे प्रताड़ना का शिकार होना पड़ रहा है। जो प्रताड़ना एवं मानसिक यातना खुशी दुबे ने झेली है, उसकी कल्पना भी कर पाना मुश्किल है