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एक मुस्लिम लेखक की कलम से गीता की तर्जुमा नी से सार्थक पैगाम जाएगा- वीरेंद्र सक्सेना

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लखनऊ।  गीता कुरान तौरेत और इंजील समीत तमाम धार्मिक पुस्तकें मानवता, प्रेम,और सौहार्द की शिक्षा देती हैं। सभी धर्मों में मानवता को पहला मकाम दिया गया है। सभी धर्मों के गुरूओं ने भी हमेशा मानवता और भाईचारे का पैगाम दिया है। संसार में पाए जाने वाली नफरतें और एक दूसरे से दूरी धार्मिक कारणों से है जरूरत इस बात की है के धार्मिक शिक्षाओं को आम किया जाए आपसी भाईचारे को मजबूत करने के लिए सभी धर्मों की पवित्र किताबों के पैगाम को सरल भाषा में सभी धर्मों के मानने वालों तक पहुंचाया जाए इससे गलतफहमियां दूर होंगी और एक दूसरे के लिए दिलों में आदर पैदा होगा।
इन विचारों का उद्गार आज यहां मदरसा हयात उल उलूम फिरंगी महल चौक में सिदरत उल्लाह अंसारी द्वारा लिखित गीता की रूहानी ताक़त के विमोचन समारोह से वक्ताओं ने किया । समारोह का आयोजन मसरूर एजुकेशनल सोसाइटी ने किया था जिसकी संरक्षक बेगम शहनाज़ सिदरत अध्यक्ष बज़्म ए ख़्वातीन थीं, समारोह की अध्यक्षता प्रोफेसर अब्बास रजा नय्यर ने की तथा मुख्य अतिथि वीरेंद्र कुमार सक्सेना भूतपूर्व सूचना आयुक्त उत्तर प्रदेश नरेंद्र भूषण पीसीएस अतुल कुमार श्रीवास्तव अध्यक्ष एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट स्कूल्स यूपी थे। समारोह का संचालन शकील गयावी ने किया। प्रोग्राम के कन्वीनर डॉक्टर मंसूर हसन खान ने स्वागत भाषण दिया. विभागाध्यक्ष उदू लखनऊ वि वि.
डॉक्टर अब्बास रजा नैयर ने कहा कि तमाम आसमानी किताबें हमारे लिए आदर्श है। उनको मानने वाली क़ौमें अगर उन पर अमल करें तो दुनिया स्वर्ग बन जाएगी। फिरंगी महल ऐतिहासिक दृष्टि से हमेशा इल्म व अदब और फिलॉसफी का गढ़ रहा है ।सिदरत अंसारी की किताब इसी सिलसिले की एक कड़ी है । इससे पहले सिदरत उल्लाह अंसारी ने अपनी किताब के खास खास हिस्सों पर रोशनी डाली कि अच्छे व बुर कर्मों का तसव्वर हर मजहब में है उसका उद्देश्य यही है कि लोग अच्छे कर्म करें। नरेंद्र भूषण जी ने कहा के गीता एक समंदर है और उसे मोती निकालना सिदरत उललाह अंसारी जैसे लोगों का ही काम है । सभी धर्मों ने इंसानी भाईचारे की बात अपने अपने अंदाज में कहीं है। वीरेंद्र कुमार सक्सेना जी ने कहा अच्छाई और बुराई की लड़ाई हमेशा से रही है गीता में भी सच्चाई का साथ देने को कहा गया है। उन्होंने कहा कि यह बहुत अच्छी बात है गीता की रूहानी ताकत एक मुस्लिम लेखक की कलम से आई है। एक मुस्लिम लेखक की कलम से गीता की तर्जुमा नी का बहुत पॉजिटिव पैगाम जाएगा। तंबौर से आए मुफ्ती मोहम्मद ख़बीर नदवी ने इंसानी भाईचारे के हवाले से बहुत उम्दा तकरीर कि उन्होंने कहा के मजहब पर अमल करने वाले कभी गलत हो ही नहीं सकते लोगों को उलमा और धर्मगुरुओं से मिलते रहना चाहिए ताकि समाज में भाईचारे की हवा कायम रहे । अपने धन्यवाद ज्ञापन में बेगम शहनाज़ सिदरत में कहा कि किसी भी धर्म के अमली पैरोकार किसी दूसरे मजहब से नफरत कर ही नहीं सकते। इस अवसर पर नरेंद्र भूषण मोहम्मद अली अल्वी डॉक्टर मंसूर खान जीशान इस्तखार, बलभद्र नाथ त्रिपाठी ,वकार काशिफ नजमी लखनवी शकील गयावी वगैरा शायर और कवियों ने अपना कलाम भी पेश किया।
आभार डा. सरवत तक़ी ने किया।

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