
बिहार में जातीय जनगणना को पटना हाईकोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट से हरी झंडी मिल चुकी है। सूत्रों की मानें तो राज्य में जातीय जनगणना का काम करीब 80 फीसदी तक हो गया है। बिहार के बाद अब उत्तर प्रदेश में भी जातीय जनगणना की मांग तेज होने लगी है। बीजेपी के विरोधी दल लगातार इसकी मांग कर रहे हैं और उन्हें एनडीए के दलों कई दलों का साथ मिल रहा है।
दरअसल, मायावती ने बुधवार को जातीय जनगणना पर पटना हाईकोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, ओबीसी समाज की आर्थिक, शैक्षणिक व सामाजिक स्थिति का सही ऑकलन कर उसके हिसाब से विकास योजना बनाने के लिए बिहार सरकार द्वारा कराई जा रही जातीय जनगणना (caste census) को पटना हाईकोर्ट द्वारा पूर्णत वैध ठहराए जाने के बाद अब सबकी निगाहें यूपी पर टिकी हैं कि यहाँ यह जरूरी प्रक्रिया कब?
देश में कराने की मांग
बीएसपी चीफ ने आगे कहा, “देश के कई राज्य में जातीय जनगणना के बाद यूपी में भी इसे कराने की मांग लगातार जोर पकड़ रही है, किन्तु वर्तमान बीजेपी सरकार भी इसके लिए तैयार नहीं लगती है, यह अति-चिंतनीय, जबकि बीएसपी की मांग केवल यूपी में नहीं बल्कि केन्द्र को राष्ट्रीय स्तर पर भी जातीय जनगणना करानी चाहिए। देश में जातीय जनगणना का मुद्दा, मंडल आयोग की सिफारिश को लागू करने की तरह, राजनीति का नहीं बल्कि सामाजिक न्याय से जुड़ा महत्त्वपूर्ण मामला है।”
हालांकि इससे पहले अखिलेश यादव लगातार जातीय जनगणना की मांग करते रहे हैं। बीते दिनों भी सपा प्रमुख ने कहा था, राम राज्य और समाजवाद तभी संभव है जब जातीय जनगणना होगी। जातीय जनगणना होने के बाद ही सबका साथ, सबका विकास होगा। जातीय जनगणना से ही भाईचारा आएगा। जातीय जनगणना से ही भेदभाव खत्म होगा। इससे लोकतंत्र मजबूत होगा, समाजवाद आएगा और राम राज्य आएगा।
अखिलेश और राजभर भी साथ
अखिलेश यादव के अलावा एनडीए गठबंधन से सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर भी लगातार जातीय जनगणना की मांग करते रहे हैं। गठबंधन होने से पहले ओपी राजभर के बेटे अरुण राजभर ने भी जातीय जनगणना वाली अपनी मांग दोहराई थी। इतना ही नहीं, अपना दल कमेरावादी की नेता और सपा विधायक पल्लवी पटेल भी यूपी में जातीय जनगणना की मांग का समर्थन करते रही हैं।
इनके अलावा एनडीए गठबंधन के सहयोगी दल निषाद पार्टी के अध्यक्ष और योगी सरकार में मंत्री डॉ. संजय निषाद भी कहा चुके हैं कि जातियों की जनगणना होनी चाहिए। वहीं डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने भी कई मौकों पर राज्य में जातीय जनगणना कराने की मांग का समर्थन किया है। अब ऐसे वक्त में जब अगले एक साल में कई राज्यों के विधानसभा चुनाव और फिर लोकसभा चुनाव होने वाला है, बीजेपी पर विरोधियों के साथ ही सहयोगियों का भी जातीय जनगणना को लेकर दबाव बनने लगा है।