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मां गंगा के तटो पर उमडा आस्था का सैलाब

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कानपुर:  भारत देश सनातनी मान्यताओं का देश है और यहां हर पर्व ईश्वर के साथ ही ब्रम्हाण्ड एवं प्रकृति के प्रति आभार प्रकट करने वाली हमारी परम्परा रही है और इस देश के सभी पर्व इसी पर आधारित है कि हम कैसे ईश्वर की संरचना का सम्मान करे और हर जीवों के प्रति सम्मान रखे। आस्था और श्रद्धा के पर्व कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर शहर के सभी गंगा घाटों पर पहुंचे लाखों श्रृद्धालुओ ने गंगा स्थान कर पूजा-ध्यान किया।
कानपुर के सरसैया घाट पर रविवार की शाम से ही दूर-दराज से श्रृद्धालुओं का आना शुरू हो गया था। हर बार की ही भांति भारी संख्या में श्रृद्धालुओं की के आगमन के लिए कानपुर प्रशासन द्वारा हर तैयारी को पूर्ण कर लिया था। जहां रविवार की शाम को मां गंगा की आरती की तो वहीं घाटों पर सर्दी होने के बाद भी श्रृद्धालुओ ने भोर की प्रथम प्रहर में स्नान आरम्भ कर दिया। बिठूर के ब्रम्हावर्त घाट, मौनी घाट, मैग्जीन घाट, सरसैया घाट, गोला घाट, सिद्धनाथ घाट सहित सभी घाओं पर भक्तों का जमावडा लगा रहा। भक्ती की इस गंगा में स्नान के बाद पूजन-अर्चन और दान भी दिया गया। सजग प्रशासन घाटों और आस-पास के क्षेत्रों में सर्तक रहा और यातायात व्यवस्था दुरूस्त रखा।
घर-घर में हुआ श्रीहरि विष्णु तथा तुलसी पूजन
तुलसी का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है और कार्तिक भर प्रत्येक घरों में तुलसी का तथा भगवान विष्णु का विशेष पूजन किया जाता है। कार्तिक पूर्णिमा के लिए महिलाओं ने व्रत रखा और तुलसी की पूजा की। माता तुलसी को भोग लगाया गया, उन्हे वस्त्र उढाये गये साथ ही आरती कर प्रसाद वितरण किया गया। ऐसी मान्यता है कि जो भी तुलसी की पूजा करता है उसके जीवन मंे सुख शांति होती है और उसे पुण्य की प्राप्ति होती है। वहीं भगवान विष्णु को भी तुलसी अत्यंत प्रिय है और तुलसी पूजा करने वालों पर भगवान विष्णु की भी कृपा बरसती है।

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