
एसटीएफ व गोसाईंगंज पुलिस ने आरोपी को लखनऊ से दबोचा
लखनऊ : फर्जी निवेश कंपनियां बनाकर दुबई के बुर्ज खलीफा और मुंबई की माया नगरी में रियल स्टेट में निवेश के नाम पर करोड़ों रुपए की ठगी करने वाले गिरोह के मास्टरमाइंड हरिओम यादव को एसटीएफ और गोसाईंगंज पुलिस ने आज लखनऊ से गिरफ्तार कर लिया है। गोसाईगंज पुलिस हरिओम यादव के कई साथियों को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। हरियाम यादव ने रियल स्टेट प्रा. लि., अलास्का कमोडिटीज व अलास्का इंटर प्राइजेज के नाम से फर्जी कंपनियां बनाकर लोगों को प्रतिवर्ष मोटा मुनाफा कमाने का झांसा देकर निवेश कराया और फिर पूरी रकम हड़प ली।
लखनऊ के गोसाईंगंज थाने में उसके खिलाफ ठगी और जालसाजी का मुकदमा दर्ज है। हरिओम के पास से एसटीएफ ने उसके पास से तीन मोबाइल फोन, पांच चेकबुक, एक पास बुक, एक आधार कार्ड, लैपटाॅप और 700 रुपए की नकदी भी बरामद की है। हरिओम यादव गोसाईंगंज थाना क्षेत्र के सदर करोरा का रहने वाला है।
मिठाई की दुकान से लेकर 60 करोड़ की ठगी तक का ऐसा रहा सफर
मास्टरमाइंड हरिओम यादव ने पूछताछ में बताया कि वर्ष 2000 में उसने गोसाईंगंज चौराहे पर मिठाई की दुकान चलाता था। कारोबार में फायदा न होने पर उसने 2003 में सुपर पैथालाजी में 3500 रुपए प्रतिमाह की सैलरी पर नौकरी शुरू की। 2010 में उसने पैथालाजी की नौकरी छोड.कर एक बैंक में सेल्स एडवाइजर बन गया। वर्ष 2016 में बैक की भी नौकरी छोड़ दी और अथर्व इन्फ्रा रियल स्टेट कम्पनी व किसानों की जमीन को कमीशन पर बेचने का काम शुरू कर दिया। वर्ष 2018 में हरिओम यादव ने खुद की कंपनियां बनाईं। ठग ने लखनऊ, दिल्ली, मुंबई और दुबई में अपने ऑफिस खोल लिए। आरोपियों ने इन कंपनियों में निवेश करने पर 60 प्रतिशत वार्षिक की दर से लाभ देने का लालच देकर सैकड़ों निवेशकों से 60 रुपए का निवेश करा लिया।
ब्लैक मनी पकड़े जाने के बाद फंसता चला गया
आरोपी ने यह भी कबूल किया है कि 6 फरवरी 2019 को लखनऊ के कृष्णानगर में पकड़ा गया 5 करोड. रुपए (ब्लैक मनी) उसी का था। जिसके बाद उसे गिरफ्तार भी किया गया था। 40 दिन बाद आरोपी को जमानत मिल गयी। लेकिन तब तक लोगों ने अपना पैसा मांगना शुरू कर दिया था। इस दौरान निवेशक भी घटने लगे थे। ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) इनकम टैक्स (आयकर विभाग) आदि विभागों ने मेरी कम्पनियों और कमाई की जांच भी शुरू कर दी
मोटा मुनाफा कमाने के लिए लोगों ने जमकर किया निवेश
आरोपी ने बताया कि मैंने निवेशकों का पैसा लौटाना बंद कर दिया था। जिसके कारण महेश कुमार यादव ने मेरे खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया था। महेश ने मेरी कंपनियों में 71 लाख रुपए निवेश कर रखा था। हरिओम ने बताया कि मेरी कंपनियों में सरफराज ने 60 लाख, मुशीर अहमद ने 45 लाख, अमित सिंह ने 35 लाख, बीबी सिंह ने 48 लाख, आरबी ने 22 लाख, मनोज वर्मा ने 13 लाख, राज कुमार सिंह ने 12 लाख, कन्हैया लाल ने 10 लाख, सुरेश शर्मा ने 10 लाख, बाबू राम ने 09 लाख रुपए निवेश कर रखा था। इसी तरह लगभग 600 निवेशकों ने लाखों रुपए का इनवेस्टमेंट किया था
ठगी में शामिल रहे अन्य के नाम भी उगले
ठग ने बताया महीने में एक बार वह दुबई जाता था। जिससे निवेशकों को लगता था कि कंपनी का व्यापार दुबई में भी चल रहा है। मोटा मुनाफा कमाने के लालच में लोग मेरी कंपनियों में निवेश कर रहे थे। इस काम मेरे साथ ललित चौधरी, सुभाष चन्द्र यादव, शैलेन्द्र कश्यप, राकेश कुमार यादव, अवधेश कुमार मिश्रा, नन्द किशोर यादव, गजल देव सिंह, सुरेन्द्र कुमार यादव, रूपाली गुप्ता, ब्रजेन्द्र श्रीवास्तव, आशीष वर्मा आदि प्रमुख रूप से शामिल थे
मामला मैनेज करने के लिए कथित न्यूज चैनल के मालिक को भी दिए थे सवा करोड़
हरिओम ने बताया कि कृष्णा नगर पुलिस ने जब मेरा पांच करोड़ रुपया पकड़ा था तो मैंने पुलिस प्रशासन को मैनेज करने के लिए संतोष मिश्रा नाम के एक कथित न्यूज चैनल के मालिक को 1.25 करोड रूपए दिए थे। आरोपी ने बताया कि कथित न्यूज चैनल का मालिक संतोष मिश्रा शासन व प्रशासन में पत्रकारिता का रौब दिखाकर दलाली का काम करता था। यह पशुधन घोटाला करने वाले आशीष राय का भी शरणदाता था