
गृहमंत्री अमित शाह के बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर को लेकर दिए गए बयान के बाद देशभर की राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस, बसपा समेत सभी राजनीतिक दल बीजेपी को दलित विरोधी बताते हुए दलित वोटबैंक को अपने पाले में लाने में जुट गई है। इसमें समाजवादी पार्टी भी पीछे नहीं है। 2027 में यूपी में सरकार बनाने के लिए सपा की नजर प्रदेश के करीब 21 फीसदी दलित वोटबैंक पर है। सपा अमित शाह के बयान के विरोध में रविवार को हर जिले में प्रदर्शन करने जा रही है।
अब इस मुद्दे को लेकर बसपा और कांग्रेस के बाद अब सपा भी खुलकर बीजेपी के खिलाफ आ गई है। समाजवादी पार्टी ने संसद में के बाद यूपी विधानसभा के शीतकालीन सत्र में भी इस मुद्दे को उठाया है। अब बाबा साहेब के सम्मान में समाजवादी पार्टी सड़क पर भी उतरने की तैयारी कर रही है। रविवार को सपा हर जिले में प्रदर्शन कर सकती है।
इस मुद्दे को लेकर सपा नेता मनोज यादव का कहना है कि बाबा साहेब के अपमान पर समाजवादी पार्टी वोट की राजनीति नहीं कर रही है, ये बेबुनियाद बात है। जहां अन्याय, अपमान और शोषण होगा, उसके खिलाफ समाजवादी लोग खड़े नजर आएंगे। इसलिए इस मामले पर भी समाजवादी पार्टी खड़ी है।
समाजवादी पार्टी के इस कदम को दलित वोट बैंक पर सेंधमारी के नजरिये से देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अगर अखिलेश यादव बाबा साहेब के मुद्दे को भुनाने में सफल हो जाते हैं तो 2027 विधानसभा चुनाव में सपा बीजेपी के लिए सबसे बड़ा खतरा बनकर सामने आएगी।
सपा नेता ने कहा कि समाजवादी पार्टी ही यूपी में इकलौता राजनीति दल है जो दलित, पिछड़े, अल्पसंख्यक, आधी आबादी, आदिवासी और अगड़ों में पिछड़े के अधिकारों की रक्षा कर सकती है। ऐसा 2024 के नतीजों में साफ हो गया है। उन्होंने कहा कि इससे पहले जब ब्राह्मणों के साथ योगी सरकार ने अत्याचार किया था, तब भी सपा खड़ी थी।