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क्या लखनऊ की सड़कें अब कब्रिस्तान बन चुकी हैं?

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क्या लखनऊ की सड़कें अब कब्रिस्तान बन चुकी हैं?

Lucknow News:राजधानी लखनऊ के विकास नगर क्षेत्र में एक बार फिर ज़मीन धंसी और एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। राहुल कैफे के सामने अचानक सड़क फट गई और वहाँ करीब 10 से 12 फीट चौड़ा तथा 20 से 25 फीट गहरा गड्ढा बन गया। यह दृश्य भयावह था और महज़ कुछ सेकंड पहले कोई वाहन या राहगीर वहाँ से गुज़रता, तो जान का नुकसान निश्चित था।

अब सबसे बड़ा सवाल जनता पूछ रही है —
जब अभी बारिश की एक बूंद नहीं गिरी है, तब ये हाल है, तो मानसून में क्या होगा?
और आखिर इतनी बार गड्ढा होने के बाद भी विभाग आंखें मूंदकर क्यों बैठा है?

यह कोई पहली बार नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में 4 से 5 बार इसी स्थान पर सड़क धँसने की घटनाएं हो चुकी हैं। स्थानीय नागरिक बताते हैं कि जब से इस क्षेत्र में सीवर लाइन डाली गई, तब से सड़क की स्थिति लगातार ख़राब होती गई।

क्या यह महज़ तकनीकी लापरवाही है, या गहरी प्रशासनिक सड़न?
2023 और 2024 में जब सड़क धँसी थी, तब पीडब्ल्यूडी के इंजीनियरों ने स्वीकार किया था कि संरचना की गहन जांच के बिना समाधान असंभव है। लेकिन हर बार की तरह टेंडर निकले, वादे हुए और फाइलें बंद हो गईं।

यह मार्ग सिर्फ़ कंक्रीट की पट्टी नहीं, बल्कि हज़ारों लोगों की दैनिक ज़रूरत है — स्कूली बच्चों, मरीज़ों, दफ्तर जाने वालों की जान इसी पर निर्भर करती है।

जनता जानना चाहती है:

*कौन ज़िम्मेदार है — नगर निगम, पीडब्ल्यूडी या ठेकेदार?

 

हर बार हादसे के बाद सिर्फ़ औपचारिक बयान जारी कर क्या सरकार अपनी ज़िम्मेदारी से मुक्त हो सकती है?

*और क्या वाक़ई अब लखनऊ की सड़कें मौत का इंतज़ार कर रही हैं?*

जनता की स्पष्ट माँग है:

पूरे क्षेत्र की संरचनात्मक और भौगोलिक जांच हो।

ज़िम्मेदार विभागों और अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।

जिन ठेकेदारों ने घटिया निर्माण किया है उन्हें ब्लैकलिस्ट किया जाए।

और सबसे महत्वपूर्ण — कोई स्थायी समाधान लाया जाए।

अब जनता के सब्र का बाँध टूट रहा है।
अब सवाल नहीं, सीधा जवाब और ठोस कार्रवाई चाहिए।
वरना अगली बार यह सड़क सिर्फ़ धँसेगी नहीं, बल्कि किसी मासूम की ज़िंदगी को भी निगल जाएगी — और तब सरकार के पास कहने को कुछ नहीं बचेगा।

 

 

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