
सरकार की मदरसों के खिलाफ कार्रवाई गलत; अरशद मदनी
Azamgarh News:आजमगढ़ जिले में जामिआ शरइया फैजुल उलूम में मदरसा सुरक्षा सम्मेलन का
आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में जमीअत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी भी शामिल हुए। इस सम्मेलन में सभी मसलक के मदरसों के ज़िम्मेदारों और ओहदेदारों ने शिरकत की। सम्मेलन के आयोजन और प्रबंधन की पूरी ज़िम्मेदारी जमीअत उलमा उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष मौलाना अशहद रशीदी को सौंपी गई थी। पिछले कुछ वर्षों के दौरान जिस अंदाज़ की राजनीति देश में हुई है इससे मुसलमानों को कोई लाभ नहीं हुआ।

उल्टे मुसलमानों के साथ उनकी शिक्षण संस्थानों अर्थात मदरसों को भी निशाने पर ले लिया गया ताकि न केवल यह कि मुसलमानों को राजनीतिक रूप से कमज़ोर कर दिया जाए बल्कि उन्हें धार्मिक शिक्षा से भी संभव तरीक़े से वंचित रखा जाए। यह अभियान न केवल सुप्रीम कोर्ट के आदेश का खुला उल्लंघन है बल्कि इसके द्वारा संविधान को भी पैरों तले रौंदने का प्रयास हो रहा है। बैठक में आगे कहा गया कि दारुल उलूम देवबंद की स्थापना ही इसलिए की गई थी ताकि अंग्रेज़ों के खिलाफ संघर्ष करने और देश को आज़ाद कराने के लिए कार्यकर्ता पैदा किए जाएं। जो लोग मदरसों के खिलाफ यह सब कर रहे हैं वो लोग मदरसों की भूमिका से अनभिज्ञ हैं। जमीअत उलमा-ए-हिंद का संबंध मदरसों से है, हमारे सारे बड़े यहीं से पढ़ कर बाहर निकले। मीडिया से बातचीत करते हुए कहा मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि कार्यकम का मुख्य उद्देश्य मुल्क में प्यार मोहब्बत को कायम रखना है। सरकार और पार्टियों को ऐसा काम नहीं करना चाहिए जो देश में अमन चैन के लिए अच्छा ना हो। जो लोग मदरसों को तोड़ रहे हैं वह गलत है। पूर्वी उत्तर प्रदेश के मदरसों पर कार्रवाई शुरू हुई है इसको लेकर आजमगढ़ में इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिससे यहां के लोगों की राय लेकर आगे की रणनीति तैयार की जा सके।