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छह महीने से वेतन-पेंशन से वंचित जल निगम कर्मी, आम आदमी पार्टी ने सरकार को घेरा

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छह महीने से वेतन-पेंशन से वंचित जल निगम कर्मी, आम आदमी पार्टी ने सरकार को घेरा

लखनऊ: उत्तर प्रदेश जल निगम के 23 हजार से अधिक कर्मचारियों और पेंशनधारकों को बीते छह महीनों से वेतन और पेंशन नहीं मिली है। इस गंभीर मुद्दे पर आम आदमी पार्टी ने प्रदेश सरकार को आड़े हाथों लिया है। पार्टी के मुख्य प्रदेश प्रवक्ता वंशराज दुबे ने रविवार को एक बयान जारी करते हुए राज्य सरकार पर संवेदनहीनता और निकम्मेपन का आरोप लगाया।वंशराज दुबे ने कहा कि जल निगम के हजारों कर्मचारी और पेंशनर्स आधे साल से आर्थिक संकट में हैं, जिससे उनके परिवार भूखे रहने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों की फीस, घर का राशन, बीमार परिजनों का इलाज और बुजुर्गों की पेंशन तक रुक गई है, लेकिन सरकार चुप है। उन्होंने सवाल किया कि क्या यही है भाजपा की ‘डबल इंजन’ सरकार, जो अपने ही कर्मचारियों की तकलीफ को नजरअंदाज कर रही है?आप प्रवक्ता ने आगे कहा कि जल निगम के कई कर्मचारी अब आत्महत्या जैसे कदम उठाने की सोचने को मजबूर हैं। यह सिर्फ एक आर्थिक संकट नहीं, बल्कि संवैधानिक और मानवीय अधिकारों का खुला उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की चुप्पी इस पूरे मसले पर उसकी असंवेदनशीलता और लापरवाही को दर्शाती है।वंशराज दुबे ने दिल्ली सरकार के उदाहरण का हवाला देते हुए कहा कि वहां अरविंद केजरीवाल सरकार ने डीटीसी के रिटायर्ड कर्मचारियों की बकाया पेंशन समय से उनके खाते में पहुंचाई और उनकी वृद्धावस्था पेंशन को दोबारा शुरू कराया। लेकिन उत्तर प्रदेश में जल निगम के कर्मचारी और पेंशनर्स अपने हक की रकम के लिए दर-दर भटक रहे हैं और ‘जिंदा लाश’ जैसे हालात में जीवन बिता रहे हैं।उन्होंने कहा कि भाजपा के लिए यह सिर्फ आंकड़े हो सकते हैं, लेकिन आम आदमी पार्टी के लिए यह 23 हजार परिवारों के जीवन और सम्मान का प्रश्न है। उन्होंने कहा कि मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए उनके मुखिया की तनख्वाह और पेंशन ही उनके जीवन का सहारा होती है, और इसे छीन लेना उनके अस्तित्व को खतरे में डालना है।प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार ने इस विषय पर तुरंत हस्तक्षेप कर वेतन और पेंशन का भुगतान नहीं किया, तो आम आदमी पार्टी सड़कों पर उतरकर जल निगम कर्मियों के हक की लड़ाई लड़ेगी।

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