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कांवड़ यात्रा और मीट शॉप का विवाद’

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कांवड़ यात्रा और मीट शॉप का विवाद’

कांवड़ यात्रा: हरिद्वार के पास एक छोटा-सा शहर है, नाम है मंगला पुर। हर साल सावन आते ही पूरा इलाका भगवा रंग में रंग जाता है।

 

जगह-जगह भंडारे, शिविर और डीजे की धुन पर नाचते कांवड़िए दिखाई देने लगते हैं। इस बार भी सब वैसा ही होने वाला था, लेकिन कुछ दिन पहले नगर निगम की तरफ से एक नोटिस जारी हुआ — “कांवड़ यात्रा के दौरान शहर की सभी मीट और मछली की दुकानें बंद रहेंगी।”

बस, फिर क्या था। इस फैसले पर सियासत गरमा गई। एक तरफ हिन्दू संगठनों ने कहा कि ये फैसला श्रद्धालुओं की भावना के लिए ज़रूरी है। लेकिन दूसरी तरफ, मुस्लिम समुदाय खासकर जो मीट का कारोबार करते थे, उन्होंने इसे नाइंसाफी बताया।

एक मोहम्मद साहब हैं, जो पिछले 20 सालों से अपने बाप-दादा की पुरानी मीट शॉप चला रहे हैं। उन्होंने कहा, “भाईसाब, हम रोज़ी-रोटी कमाने वाले लोग हैं। हमें भी धार्मिक भावनाओं की इज़्ज़त है, लेकिन क्या हर त्योहार पर हमारी दुकान ही बंद होगी?”

मोहल्ले की मस्जिद के इमाम साहब ने भी बयान दे दिया, “ये तुगलकी फरमान है! संविधान में सबको बराबरी का हक़ है। अगर ये नियम सभी धर्मों पर एक जैसा नहीं लागू होता, तो सवाल तो उठेगा।”

टीवी चैनल वाले भी पहुंच गए। एक रिपोर्टर ने एक कांवड़िए से पूछा — “क्या आपको मीट शॉप खुली रहने से दिक्कत होती है?” उसने मुस्कुराते हुए कहा, “भाई, हमें तो बस भोलेनाथ तक पहुंचना है। दुकान बंद हो या खुली, हमारा ध्यान यात्रा में है।”

अब बात सिर्फ भावनाओं की नहीं थी, राजनीति भी घुस चुकी थी। स्थानीय विधायक ने तुरंत ट्वीट कर दिया, “श्रद्धा का अपमान बर्दाश्त नहीं होगा।” और विपक्ष बोला, “इससे छोटे व्यापारियों की कमर टूट रही है।”

पुलिस-प्रशासन ने बीच का रास्ता निकाला — मुख्य यात्रा मार्ग पर मीट शॉप्स को ढक कर चलाने की इजाज़त होगी, लेकिन खुले में बेचने की मनाही रहेगी। कुछ मान गए, कुछ नाराज़ हुए।

इस पूरे विवाद ने एक बात तो साफ कर दी — देश में आस्था और आजीविका, दोनों को साथ लेकर चलना आसान नहीं है। और जब भी कोई धर्म या त्योहार आता है, सियासत उस पर सवारी ज़रूर करती है।

• मीट व शराब की दुकानों को कांवड़ यात्रा मार्ग से दूर रखने के आदेश दिए गए। उनका तर्क था कि इससे श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं का सम्मान होगा और शांति बनी रहेगी \

• मौर्य ने कहा कि यात्रा में व्यवधान डालने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी और यह कार्रवाई यात्रा की ‘पवित्रता’ बनाए रखने के लिए जरूरी है ।

 

सपा–बसपा–कांग्रेस–राल्डी–जदयू के नेता

• मायावती (BSP) ने आदेश को “गलत” करार दिया, सपा सांसद एस. टी. हसन ने इसे समाज को बांटने की साजिश बताया

• कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि यह मुसलमानों का बहिष्कार सामान्य करने की नीयत है

 

• जदयू व राल्डी ने यूपी सरकार के इस कदम को “विभाजनकारी व असंवैधानिक” बताया ।

 

मौलाना कौसर हयात का गुस्सा फूट पड़ा और इसे मुस्लिम विरोधी फैसला बताया, सुनिए मौलाना ने क्या-क्या बोलकर चौंका दिया….

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