
क्या छिन जाएगी भारतीय नागरिकता?
इंडिया Live: बिहार में हाल ही में वोटर लिस्ट की जांच को लेकर हलचल मच गई है। चुनाव आयोग ने “स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न” के तहत लाखों वोटरों से खुद और अपने माता-पिता के जन्म प्रमाण पत्र मांगना शुरू किया है।
इस कदम को लेकर लोगों में डर है कि यह कहीं NRC (नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिज़न्स) की तैयारी तो नहीं। AIMIM नेता असदुद्दीन ओवैसी और कई विपक्षी दलों ने इसे “बैकडोर NRC” बताया है। उनका कहना है कि इससे गरीब, ग्रामीण और सीमांचल के लोग, जिनके पास दस्तावेज़ नहीं हैं, वोटर लिस्ट से बाहर हो सकते हैं। चुनाव आयोग का कहना है कि यह सिर्फ वोटर लिस्ट को सही करने की प्रक्रिया है, नागरिकता की जांच नहीं। लेकिन लोगों में चिंता बढ़ती जा रही है कि कहीं ये कागज़ों के नाम पर उनकी पहचान ही न छिन जाए।
आजकल देश के कई हिस्सों में एक सवाल बहुत उठ रहा है – क्या NRC आने से हमारी नागरिकता छिन सकती है? खासकर उन लोगों के बीच जो गरीब हैं, जिनके पास ज़रूरी कागज़ नहीं हैं, या जो गांवों में रहते हैं।
NRC यानी नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीज़न्स एक ऐसा रजिस्टर है जिसमें यह तय किया जाता है कि कौन भारत का असली नागरिक है और कौन नहीं। सरकार का कहना है कि इसका मकसद अवैध घुसपैठियों की पहचान करना है। लेकिन आम लोग डर गए हैं – उन्हें लग रहा है कि अगर उनके पास पुराने दस्तावेज़ नहीं हुए तो उन्हें भारत का नागरिक नहीं माना जाएगा।

असम में NRC पहले ही लागू हो चुका है। वहां करीब 19 लाख लोगों के नाम लिस्ट में नहीं आए थे। ये लोग अब परेशान हैं, क्योंकि उनके पास ऐसे कागज़ नहीं थे जो साबित कर सकें कि उनके पुरखे 1971 से पहले भारत में रह रहे थे। अब ये डर और चिंता दूसरे राज्यों में भी फैल रही है।
हाल ही में खबरें आई हैं कि कुछ राज्यों में NRC की तैयारी चल रही है। सरकार कह रही है कि अभी यह सिर्फ एक प्रक्रिया है – जैसे लोगों का डेटा इकट्ठा करना, या कागज़ जांचना। लेकिन लोग डरे हुए हैं। उन्हें लग रहा है कि फिर से उन्हें अपने पुरखों के दस्तावेज़ देने होंगे – और अगर वे नहीं दे पाए तो उन्हें “घुसपैठिया” कह दिया जाएगा।
बहुत से लोग जैसे गरीब, मजदूर, आदिवासी और महिलाएं – उनके पास पुराने दस्तावेज़ नहीं होते। किसी का जन्म अस्पताल में नहीं हुआ, किसी का स्कूल नहीं गया, किसी के पास जमीन के कागज़ नहीं हैं। ऐसे में वे लोग क्या करेंगे?लोगों की मांग है कि अगर NRC लाया जाता है, तो उसमें साफ़ और सरल नियम बनाए जाएं। लोगों को कागज़ दिखाने के लिए डराया न जाए। और जो भारतीय हैं, उन्हें किसी कीमत पर बाहर नहीं निकाला जाए।सरकार का कहना है कि अभी कोई देशव्यापी NRC नहीं लाया जा रहा है, और जो भी होगा, सब कुछ कानून के तहत होगा। लेकिन फिर भी लोग सतर्क हैं। कई जगहों पर छोटे-छोटे प्रदर्शन भी हुए हैं।लोगों की सबसे बड़ी चिंता यही है – “अगर NRC आया, और हम दस्तावेज़ नहीं दिखा पाए, तो क्या हम भारतीय नहीं रहेंगे?”
ये सवाल अब हर गली-मोहल्ले में पूछे जा रहे हैं। और जब तक सरकार पूरी तरह साफ़ नहीं करती, लोगों की चिंता और डर बना रहेगा।