
आखिर मुस्लिम गुस्से में क्यों?
“Udaipur Files” ‘ उदयपुर फाइल्स’ एक हिंदी फिल्म है जो साल 2022 में राजस्थान के उदयपुर शहर में हुए दर्जी कन्हैयालाल की हत्या पर आधारित है।

फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे दो मुस्लिम युवकों ने कन्हैयालाल की उसके दुकान में घुसकर हत्या कर दी थी,
क्योंकि उसने नूपुर शर्मा के पैगंबर मोहम्मद पर दिए बयान का समर्थन किया था। इस हत्या का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था और पूरे देश में आक्रोश फैल गया था। फिल्म इस घटना के साथ-साथ धार्मिक कट्टरता, आतंकवादी संगठनों की भूमिका और कुछ धार्मिक संस्थानों पर सवाल उठाती है। फिल्म के ट्रेलर में देवबंद और मदरसों से जुड़े दृश्यों को देखकर मुस्लिम संगठन जमीयत उलमा-ए-हिंद ने नाराज़गी जताई और आरोप लगाया कि फिल्म एक समुदाय को बदनाम करती है और समाज में नफरत फैलाती है। उन्होंने इसे मुस्लिम विरोधी बताया और दिल्ली, मुंबई और गुजरात के हाईकोर्टों में याचिका दायर कर फिल्म की रिलीज़ पर रोक लगाने की मांग की। उनका कहना है कि फिल्म संविधान के समानता, धार्मिक स्वतंत्रता और सम्मान के अधिकारों का उल्लंघन करती है। साथ ही, उन्होंने आरोप लगाया कि सेंसर बोर्ड ने बिना पूरी जांच के फिल्म को सर्टिफिकेट दे दिया। दूसरी ओर, विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने फिल्म का समर्थन करते हुए कहा कि यह फिल्म सच्चाई दिखा रही है और लोगों को जागरूक कर रही है। फिलहाल मामला अदालत में है और 11 जुलाई 2025 को फिल्म की रिलीज़ निर्धारित है, लेकिन कोर्ट के फैसले पर ही अब यह निर्भर करता है कि फिल्म रिलीज़ होगी या नहीं। फिल्म को लेकर देशभर में बहस छिड़ गई है कि क्या यह अभिव्यक्ति की आज़ादी है या नफरत फैलाने का एक ज़रिया।
‘उदयपुर फाइल्स’ फिल्म का बहिष्कार (बॉयकॉट) इसलिए किया जा रहा है क्योंकि कई लोगों और मुस्लिम संगठनों का मानना है कि यह फिल्म मुस्लिम समुदाय को गलत तरीके से दिखाती है। फिल्म के ट्रेलर में कुछ ऐसे दृश्य हैं जिनमें मदरसों, मस्जिदों और देवबंद जैसे धार्मिक स्थलों को आतंकवाद और कट्टरपंथ से जोड़ा गया है, जिससे एक पूरे समुदाय की छवि खराब होती है। विरोध करने वालों का कहना है कि फिल्म का मकसद समाज में नफरत फैलाना और हिंदू-मुस्लिम के बीच तनाव बढ़ाना है। उनका यह भी आरोप है कि फिल्म में केवल एकतरफा कहानी दिखाई गई है, जो भड़काऊ है और देश की गंगा-जमुनी तहज़ीब के खिलाफ है। फिल्म में कन्हैयालाल की हत्या, ज्ञानवापी विवाद और नूपुर शर्मा के बयान जैसे संवेदनशील मामलों को जोड़कर दिखाया गया है, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हो सकती हैं। सोशल मीडिया पर भी फिल्म को लेकर #BoycottUdaipurFiles ट्रेंड चलाया जा रहा है और मांग की जा रही है कि फिल्म की रिलीज़ पर रोक लगाई जाए या उसमें बदलाव किए जाएं। इसी वजह से फिल्म पर विवाद बढ़ता जा रहा है और कई लोग इसका बहिष्कार कर रहे हैं।
उदयपुर फाइल्स’ फिल्म का सबसे बड़ा विरोध जमीयत उलमा-ए-हिंद नाम के मुस्लिम संगठन ने किया है। इस संगठन के प्रमुख मौलाना अरशद मदनी ने साफ तौर पर कहा है कि यह फिल्म समाज में धार्मिक नफरत फैलाने वाली है और इसका मकसद एक पूरे समुदाय को बदनाम करना है। उन्होंने आरोप लगाया कि फिल्म में देवबंद, मदरसों और मुस्लिम धार्मिक स्थलों को आतंकवाद से जोड़ा गया है, जो बिल्कुल गलत और दुर्भावनापूर्ण है। उनका कहना है कि इस फिल्म के ज़रिए यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि इस्लामिक संस्थान आतंकवाद सिखाते हैं, जो हकीकत से बहुत दूर है।
इसके अलावा, सोशल मीडिया पर कई मुस्लिम नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम लोगों ने भी फिल्म की आलोचना की है और कहा है कि यह फिल्म समाज में जहर घोलने का काम कर रही है। उन्होंने इसे ‘द कश्मीर फाइल्स’ और ‘केरल स्टोरी’ जैसी फिल्मों की तर्ज पर बनाई गई एकपक्षीय और भड़काऊ फिल्म बताया है।