
क्या डोनाल्ड ट्रम्प टैरिफ लगाकर भारत को बर्बाद करना चाहते हैं?
इण्डिया Live:अभी हाल ही में एक बड़े देश की तरफ से यह बयान आया कि अगर वे सत्ता में आते हैं, तो भारत से आने वाले सामान पर भारी टैरिफ यानी आयात शुल्क लगाया जाएगा। इस बात को लेकर भारत में कुछ लोग चिंतित हो गए सोशल मीडिया पर चर्चाएं शुरू हो गईं कि क्या यह भारत को नुक़सान पहुंचाने की कोई साज़िश है? क्या यह भारत की बढ़ती ताकत से डर है? क्या कोई हमें रोकना चाहता है?

इन सवालों का जवाब बहुत सोच-समझकर देने की ज़रूरत है। क्योंकि हर चीज़ दिखती जैसी है, वैसी होती नहीं।

टैरिफ क्या होता है और क्यों लगाया जाता है?
टैरिफ यानी टैक्स, जो किसी देश में बाहर से आने वाले सामान पर लगाया जाता है। मान लीजिए भारत से कोई चीज़ 100 रुपये में अमेरिका जाती है। अगर वहां 50% टैरिफ लगा दिया गया, तो वो चीज़ वहां जाकर 150 रुपये की हो जाएगी। अब वही चीज़ अगर अमेरिका में ही 140 रुपये में बन रही है, तो लोग वहां की बनी चीज़ ही खरीदेंगे।
यही मकसद होता है टैरिफ लगाने का — अपनी फैक्ट्रियों को, अपने लोगों को काम देने के लिए बाहर की चीज़ों को महँगा करना।
ये कोई दुश्मनी का तरीका नहीं, बल्कि एक आर्थिक नीति होती है। इससे कई बार भारत ने भी काम लिया है।
क्या भारत को नुक़सान होगा?
अगर कोई देश भारत के सामान पर टैरिफ लगाता है, तो क्या इससे भारत की इकॉनमी को झटका लगेगा?
सीधा जवाब है — कुछ हद तक असर हो सकता है, लेकिन भारत को इससे डरने की ज़रूरत नहीं है।
पहली बात, आज का भारत 10-15 साल पहले वाला भारत नहीं है।
आज हम केवल एक निर्यातक नहीं, एक बड़ा उपभोक्ता बाज़ार भी हैं। दुनिया भर की कंपनियाँ भारत में निवेश कर रही हैं, मैन्युफैक्चरिंग कर रही हैं, और यहीं से पूरी दुनिया में सप्लाई कर रही हैं।
दूसरी बात, अगर एक बाज़ार संकीर्ण होता है, तो भारत को दूसरे बाज़ारों की तरफ देखना चाहिए। अफ्रीका, मिडिल ईस्ट, लैटिन अमेरिका, यूरोप — हर जगह भारत के लिए संभावनाएँ हैं।
तीसरी और सबसे बड़ी बात — यह हमारे लिए आत्मनिर्भर बनने का और बेहतर मौका है। जितना हम दुनिया पर निर्भर होंगे, उतना ही बाहर की नीतियाँ हमें प्रभावित करेंगी। लेकिन अगर हम अपने देश में, अपने लोगों के लिए निर्माण और रोज़गार के साधन बढ़ा पाएं, तो हमें कोई बाहर वाला झुका नहीं सकता।
**यह एक साज़िश नहीं, घरेलू राजनीति का हिस्सा है**
जब कोई देश टैरिफ लगाने की बात करता है, तो उसके पीछे कई बार घरेलू राजनीति होती है, ना कि कोई अंतरराष्ट्रीय साज़िश।
अगर किसी देश में लोग बेरोज़गार हो रहे हैं, तो वहाँ के नेता यह दिखाना चाहते हैं कि वो उनकी नौकरियाँ बचाने के लिए सख़्त कदम उठा रहे हैं। टैरिफ लगाना उसी का एक तरीका है।
भारत का इसमें नाम लिया जाना सिर्फ इसलिए होता है क्योंकि भारत अब एक बड़ी ताक़त बन रहा है। हम बहुत कुछ बना रहे हैं और बहुत कुछ बेच रहे हैं। ऐसे में नाम लिया जाना भी इस बात का संकेत है कि भारत को अब गिनती में लिया जाता है।
हमें क्या करना चाहिए?**
अब बात ये है कि भारत को इस पूरी स्थिति में कैसे प्रतिक्रिया देनी चाहिए?
1. घबराना नहीं है।** यह कोई नई बात नहीं है, और न ही भारत के लिए कोई बड़ा खतरा।
2. **फैक्ट्री और टेक्नोलॉजी पर फोकस बढ़ाना है।**
भारत को अपने उत्पादन की क्षमता और तकनीक को और बेहतर बनाना होगा, ताकि हम सिर्फ सस्ता सामान न बेचें, बल्कि क्वालिटी में भी टक्कर दें।
3. बाज़ारों को फैलाना है।
सिर्फ एक या दो देशों पर निर्भर नहीं रहना है। हमें दूसरे देशों तक पहुंच बनानी है।
4. नीति में स्थिरता और समर्थन लाना है।
सरकार और उद्योग जगत को मिलकर ऐसा माहौल बनाना होगा जहाँ निर्यात बढ़े, लेकिन घरेलू मांग भी मजबूत हो।
5. शिक्षा और स्किल्स पर निवेश करना है।
ताकि भारत का युवा सिर्फ उपभोक्ता न बने, बल्कि उत्पादक भी बने।
अगर कोई देश भारत के सामान पर टैरिफ लगाता है, तो यह एक झटका ज़रूर है, लेकिन हार नहीं। ये वही पल है जब हमें यह तय करना है कि क्या हम शिकायती मुद्रा में रहेंगे या समाधान खोजने वाले बनेंगे।
दुनिया अब बहुपक्षीय हो चुकी है। एक दरवाज़ा बंद होता है, तो कई खिड़कियाँ खुल जाती हैं — बशर्ते हमें उन्हें ढूंढना आता हो।
अब समय है कि भारत डरे नहीं, बल्कि दृढ़ता से आगे बढ़े — अपनी ताक़त पर, अपनी मेहनत पर और अपनी दूरदर्शिता पर भरोसा करते हुए।