
कुछ घंटे बाद जंग की गूंज।
मध्य पूर्व एक बार फिर युद्ध के मुहाने पर खड़ा है। ईरान और उसके विरोधी देशों के बीच टकराव की आशंका अब केवल एक संभावना नहीं रह गई है — बल्कि हालात ऐसे बन चुके हैं कि बस कुछ घंटे बाद युद्ध की शुरुआत हो सकती है। ईरान की ओर से हर स्तर पर सैन्य तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। इस तनाव के केंद्र में हैं — ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई, जिनके एक इशारे पर हज़ारों मिसाइलें दागे जाने की संभावना जताई जा रही है।

सूत्रों के मुताबिक, ईरान ने अपने सभी बड़े मिसाइल बेस को एक्टिव कर दिया है। ड्रोन यूनिट्स और बैलिस्टिक मिसाइल सिस्टम पूरी तरह से फायरिंग पोजिशन में हैं। देश की सीमा के पास बड़े पैमाने पर सैनिकों की तैनाती की जा चुकी है। यह तैयारी ना सिर्फ रक्षा के लिए है, बल्कि एक निर्णायक पलटवार के लिए भी मानी जा रही है।
ईरानी मीडिया और सेना के प्रवक्ताओं के हालिया बयानों ने इस तनाव को और हवा दी है। उनका कहना है कि यदि दुश्मन देशों — खासकर अमेरिका या इज़राइल — ने कोई भी उकसावे वाली कार्रवाई की, तो उसका जवाब “इतिहास में सबसे तेज़ और विनाशकारी हमला” होगा।
वहीं दूसरी तरफ अमेरिका ने भी अपने नौसैनिक युद्धपोत खाड़ी क्षेत्र में तैनात कर दिए हैं। सऊदी अरब, इज़राइल और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों ने एयर डिफेंस सिस्टम को एक्टिवेट कर दिया है। डिप्लोमैटिक बातचीत ठप हो चुकी है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस स्थिति को “गंभीर संकट” के रूप में देख रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है — क्या खामेनेई ट्रिगर दबाएंगे? क्या ईरान वाकई युद्ध की आग में कूदेगा, या यह सिर्फ दबाव बनाने की रणनीति है?
एक तरफ सैटेलाइट इमेज में मिसाइल लांचर तैयार खड़े दिखाई दे रहे हैं, दूसरी ओर पूरी दुनिया साँस रोककर देख रही है कि आने वाले कुछ घंटे इतिहास में क्या दर्ज करेंगे — संघर्ष या समझौता?