
दुबई में ग़ैर-मुस्लिम तेजी से बन रहे है मुसलमान।
Dubai News:दुबई में मुसलमानों की संख्या में निरंतर वृद्धि देखी जा रही है—इसके पीछे कई सामाजिक, शैक्षिक और सांस्कृतिक प्रयास हैं, जो इस्लाम को वैश्विक रूप से और भी मजबूत बना रहे हैं।

2025 की पहली छमाही में दुबई में 3,600 से अधिक लोगों ने इस्लाम अपनाया। यह वृद्धि दुबई की इस्लामी संस्थाओं द्वारा संचालित सांस्कृतिक और शैक्षिक पहलों का परिणाम है, जिनका उद्देश्य संवाद और जानकारी को बढ़ावा देना है। दुबई सरकार ने मस्जिदों को सिर्फ इबादतगाह न मानकर उन्हें सामुदायिक और सांस्कृतिक केंद्रों के रूप में विकसित करने के लिए AED 560 मिलियन की योजना शुरू की है। इस योजना के तहत ये मस्जिदें सामाजिक कार्यक्रमों, शिक्षा और समुदायिक भागीदारी का भी केंद्र बन रही हैं। दुबई की सभी मस्जिदें और धार्मिक गतिविधियाँ सरकारी नियंत्रण में होती हैं, जिससे स्थिरता और एकरूपता सुनिश्चित होती है।

वैश्विक स्तर पर इस्लाम सबसे तेज़ी से बढ़ने वाला धर्म बन चुका है। 2010 से 2020 के बीच इस धर्म के अनुयायियों की संख्या में लगभग 347 मिलियन की वृद्धि हुई, जिससे इसकी वैश्विक हिस्सेदारी बढ़कर 25.6% हो गई। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण मुस्लिम आबादी की औसतन युवा उम्र और अधिक जन्म दर है। मुस्लिमों की औसत उम्र 24 साल है, जबकि गैर-मुस्लिमों की 33, और मुस्लिम महिलाओं की औसत जन्म दर 2.9 है, जो गैर-मुस्लिम महिलाओं (2.2) से अधिक है। इसी के चलते भविष्यवाणी की गई है कि 2050 तक इस्लाम दुनिया का सबसे बड़ा धर्म बन सकता है, और ईसाइयों के साथ उसकी संख्या लगभग बराबर हो जाएगी।
इन सभी कारकों का सम्मिलित प्रभाव यह दिखाता है कि दुबई केवल एक क्षेत्रीय केंद्र नहीं बल्कि वैश्विक इस्लामी आंदोलन का एक मजबूत हिस्सा बनता जा रहा है। चाहे धार्मिक रूपांतरण हो, सांस्कृतिक पहल हों या जनसांख्यिकीय परिवर्तन—इस्लाम दुनिया में सामाजिक और धार्मिक रूप से तेजी से प्रभावशाली हो रहा है।