
FIR पर तेजस्वी का उबाल, राज्यपाल आरिफ दे रहे FIR का साथ?
इंडिया Live:तेजस्वी यादव एक बार फिर सियासत के केंद्र में हैं, लेकिन इस बार वजह है खुद के खिलाफ दर्ज हुई एक एफआईआर। जैसे ही ये ख़बर सामने आई, बिहार की राजनीति में हलचल मच गई। तेजस्वी यादव ने इस पूरे घटनाक्रम को साज़िश करार दिया है और सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है।

तेजस्वी ने मीडिया से बातचीत में साफ कहा,
हम मोदी से नहीं डरते। ये एफआईआर झूठी है, और इसका मकसद हमें डराना और दबाना है। लेकिन हम डरने वाले नहीं हैं। ये जनता की आवाज़ को दबाने की कोशिश है।
तेजस्वी का आरोप है कि केंद्र सरकार, खासतौर पर बीजेपी, उन्हें और विपक्षी नेताओं को फर्जी केसों में फंसाकर बदनाम करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि जब-जब उन्होंने जनता के मुद्दे उठाए हैं — बेरोजगारी, महंगाई, भ्रष्टाचार — तभी उनके खिलाफ कार्रवाई की गई है।
इस एफआईआर को लेकर एक और अहम मोड़ तब आया जब बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने इस मामले में अप्रत्यक्ष रूप से एफआईआर का समर्थन किया। उनका रुख सरकार के पक्ष में माना जा रहा है, जिससे विपक्ष और भी उग्र हो गया है।
तेजस्वी ने राज्यपाल की भूमिका पर भी सवाल खड़े करते हुए कहा:
राज्यपाल संविधान के रक्षक होते हैं, लेकिन अफसोस कि अब वो भी सत्ता के इशारों पर काम कर रहे हैं। ये लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी है।
इस बीच, जेडीयू, बीजेपी और अन्य सत्ताधारी दलों की ओर से प्रतिक्रिया भी आई है। इन दलों का कहना है कि कानून अपना काम कर रहा है और किसी को कानून से ऊपर नहीं समझा जा सकता। उनका कहना है कि अगर तेजस्वी बेगुनाह हैं तो उन्हें डरने की ज़रूरत नहीं है।
इस पूरे मामले ने बिहार की राजनीति को एक बार फिर गरमा दिया है। एक ओर तेजस्वी खुद को जनता का सच्चा प्रतिनिधि बता रहे हैं जो सत्ता के खिलाफ आवाज़ उठाता है, वहीं दूसरी ओर सत्ताधारी गठबंधन इसे कानून की प्रक्रिया और भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई बता रहा है।
जनता के बीच भी इस मुद्दे को लेकर चर्चा गर्म है। क्या यह सचमुच कानून का काम है या एक राजनीतिक बदले की कार्रवाई? क्या वाकई मोदी सरकार विपक्षी नेताओं को डराने की नीति पर चल रही है? और क्या तेजस्वी यादव इस चुनौती को पार कर पाएंगे?
एक बात तो तय है — आने वाले दिनों में बिहार की सियासत और भी गर्म होगी, और यह मामला विधानसभा से लेकर संसद तक गूंज सकता है।