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मस्जिद का क़याम, हिजरत और भाईचारा सीरते नबवी स0 के अहम पहलू: जकी नूर अजीम नदवी

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मस्जिद का क़याम, हिजरत और भाईचारा सीरते नबवी स0 के अहम पहलू: जकी नूर अजीम नदवी

सोशल एण्ड एजुकेशनल एवेयरनेस फोरम के तत्वावधान में कार्यक्रम का आयोजन’

Lucknow,: सोशल एण्ड एजुकेशनल एवेयरनेस फोरम के तत्वावधान में आज एक अहम इल्मी और दीनी कार्यक्रम, मीटिंग हॉल, नूर कॉम्प्लेक्स, मुकारिम नगर, डालीगंज, लखनऊ में आयोजित किया गया। इस बैठक का केंद्रीय विषय था “रबीउल अव्वल में नबी स0 के जन्म के अतिरक्त अन्य ऐतिहासिक घटनाएँ”’। कार्यक्रम की शुरुआत सैयद अबुल हसन खुबैब की तिलावत कुरआन से हुई।

इस अवसर पर मौलाना जकी नूर अजीम नदवी ने मुख्य वक्तव्य प्रस्तुत करते हुए कहा किः “रबीउल अव्वल के महीने में केवल नबी अकरम स0 का जन्म ही नहीं हुआ, बल्कि इसी मुबारक माह में इस्लामी इतिहास की नई बुलंदियों का कारण बनने वाली महान घटना हिजरत भी पेश आई। इसी महीने मस्जिदे कुबा और मस्जिद नबवी की नींव रखी गईं। फिर नबी स0 ने इस्लाम की सबसे बड़ी विशेषता भाईचारे पर आधारित इस्लामी समाज के निर्माण के लिए मुहाजिरीन और अंसार के बीच ‘भाईचारे’ का वह नमूना पेश किया जो किसी भी समाज की तरक्की और खुशहाली का सबसे बड़ा जरिया है। इसी माह में खलिाफते राशिदा का कयाम भी हुआ और सहाबा किराम ने दुनिया को दिखा दिया कि नबी के बाद इंसानियत की रहनुमाई और तरक्की की नींव कैसे रखी जा सकती है।”

सेवानिवृत्त जस्टिस महमूद अहमद खान ने इस प्रकार के कार्यक्रमों के आयोजन पर बल दिया और मुसलमानों को शिक्षा तथा हिजरत के उद्देश्यों को समझकर अपनी जिंदगी में ढालने की नसीहत की।

कार्यक्रम की अध्यक्षता लखनऊ विश्वविद्यालय के विद्वान प्रोफेसर डॉ. मुशीर हुसैन सिद्दीकी ने की। उन्होंने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि नबी करीम स0 की सीरत पढ़ना, उसे आम करना और खास तौर पर राश्ट्रीय भाइयों को इससे अवगत कराना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

इस इल्मी व दीनी बैठक में शहर के प्रमुख विद्वान और बुद्धिजीवी शामिल हुए, जिनमें वकील दानिश मुजतबा, डॉ. मोहम्मद इदरीस नदवी, डॉ. अम्मार नगरामी, मौलाना वकील बाराबंकवी नदवी, मौलाना शमीम नदवी, इंजीनियर इसहाक, मिराजुल हसन नदवी,, अहमद नगरामी, सैयद अकील अहमद, अशरफ फिरदौसी नदवी, रियाजुद्दीन नदवी आदि खास तौर पर शरीक हुए।

यह कार्यक्रम इल्मी व फिक्री एतिबार से बेहद कामयाब और यादगार साबित हुआ। इसमें शामिल विद्वानों और बुद्धिजीवियों ने विषय की उपयोगिता को सराहा और इसे नई नस्ल के लिए मार्गदर्शक करार दिया।

अंत में डॉ. हारून रशीद सिद्दीकी (रजिस्ट्रार नदवतुल उलमा, लखनऊ) की दुआ पर यह बैठक सम्पन्न हुई।

जारीकर्ता

सैयद अबुल हसन

9696931822

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