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भारत की सुरक्षा में बड़ी सेंध, “ब्रहमोस का सीक्रेट बेच दिया।

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भारत की सुरक्षा में बड़ी सेंध, “ब्रहमोस का सीक्रेट बेच दिया।

इंडिया Live:भारत की गिनती आज दुनिया के सबसे शक्तिशाली देशों में होती है – खासकर उसकी मिसाइल ताकत को देखकर। लेकिन सोचिए, जब देश की सुरक्षा से जुड़ा कोई व्यक्ति ही दुश्मनों से मिल जाए, तो? ऐसा ही हुआ भारत की खुफिया एजेंसी RAW के एक अफसर के साथ, जिसने पैसे और लालच के लिए भारत की रक्षा तकनीक को दांव पर लगा दिया।

यह घटना 2023 की है, जब सुरक्षा एजेंसियों को शक हुआ कि ब्रह्मोस मिसाइल यूनिट से जुड़ी कुछ बेहद गोपनीय जानकारियाँ लीक हो रही हैं। शुरुआती जांच में जब इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस और खुफिया नेटवर्क की मदद ली गई, तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ – एक अफसर, जो RAW से जुड़ा हुआ था, उसने ही दुश्मन देश को ये डाटा बेचा था।

इस अफसर की पहचान आरिफ खान के रूप में हुई, जो मूलतः राजस्थान का रहने वाला है। शुरू में वह भारतीय सेना में था, फिर RAW से जुड़ा। यह शख्स दुबई में जाकर विदेशी एजेंटों के संपर्क में आया। वहाँ उसे फँसाया गया – पहले पैसों के लालच में, फिर ब्लैकमेलिंग करके। इसके बाद उसने ब्रह्मोस मिसाइल से जुड़ी फाइलें, तकनीकी डाटा और लोकेशन जानकारी दुश्मनों को भेजी।

ब्रह्मोस भारत की सबसे तेज़ सुपरसोनिक मिसाइलों में से एक है, जिसे भारत और रूस ने मिलकर बनाया है। इसकी मारक क्षमता और सटीकता को दुनिया मानती है।

आरिफ ने जो डाटा लीक किया, उसमें मिसाइल की तैनाती की लोकेशन, तकनीकी विशेषताएँ, और कुछ सॉफ्टवेयर से जुड़ी जानकारी शामिल थी। हालाँकि DRDO और सुरक्षा एजेंसियों ने समय रहते इसे पकड़ लिया, जिससे बड़े हमले या गहरे नुकसान से बचाव हो गया।

 

सवाल उठता है – RAW जैसी एजेंसी, जो दुश्मन देशों में ऑपरेशन करती है, वो अपने ही अफसर की गद्दारी क्यों नहीं पकड़ पाई समय पर? दरअसल, आरिफ जैसे एजेंट बहुत समय तक डॉर्मेंट मोड (स्लीपर सेल की तरह) में रहते हैं। वो शांत रहते हैं, लेकिन मौका मिलते ही सक्रिय हो जाते हैं। इस केस में भी यही हुआ – जब वह विदेश में था, तभी उसे दुश्मन एजेंसियों ने फँसाया और भारत लौटने के बाद वह उनके लिए काम करता रहा।

 

आरिफ को तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया। ब्रह्मोस यूनिट और RAW के आंतरिक सिस्टम में सिक्योरिटी रिव्यू किया गया। जिन कंप्यूटर सिस्टम से डाटा लीक हुआ, उन्हें पूरी तरह फॉर्मेट कर नई सुरक्षा प्रणाली लगाई गई। RAW और रक्षा मंत्रालय ने इस मामले को “राष्ट्रीय खतरे” की श्रेणी में रखा है।

 

इस घटना से कई बातें साफ हो जाती हैं। आंतरिक गद्दारी बाहरी दुश्मन से ज़्यादा खतरनाक होती है। साइबर और डेटा सिक्योरिटी को हमेशा अपडेट रखना होगा। देशभक्ति सिर्फ यूनिफॉर्म पहनने से नहीं आती, नीयत भी साफ होनी चाहिए। और सबसे जरूरी बात – सुरक्षा एजेंसियों को अपने ही लोगों पर भी नजर रखनी होगी।

 

यह घटना एक चेतावनी है – सिर्फ हथियारों से देश की रक्षा नहीं होती, बल्कि उस सिस्टम को चलाने वाले लोगों की नीयत भी उतनी ही अहम होती है। आरिफ जैसे गद्दार चाहे किसी भी पद पर हों, उनके लिए देश में कोई जगह नहीं होनी चाहिए।

 

भारत ने समय रहते इसे पकड़ा – लेकिन यह सवाल छोड़ गया: क्या अगली बार भी हम इतना सौभाग्यशाली होंगे?

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