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लखनऊ में अब तेंदुए का आतंक।

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लखनऊ में अब तेंदुए का आतंक।

Panther seen in Lucknow:लखनऊ के कैंट इलाके में पहुंच चुका तेंदुआ अब और घनी आबादी वाले इलाके में पहुंच चुका है। सोशल मीडिया पर वायरल फोटो और वीडियो में दावा किया गया है कि वह बंगला बाजार के पास सालेहनगर चौराहे के पास रात में देखा गया।

हालांकि, वन विभाग ने इसकी पुष्टि नहीं की है। लखनऊ के ही उपनगरीय इलाके निगोहां के बसराह‍िया गांव में भी एक तेंदुआ रेलवे लाइन के किनारे देखा गया।

लेकिन यह पहला ऐसा मामला नहीं है। बल्कि कहा जाए कि अब लखनऊ में बाघ और तेंदुओं के देखे जाने के मामले बढ़ते जा रहे हैं तो अतिश्‍योक्ति नहीं होगी। पिछले साल दिसंबर में लखनऊ के रहमानखेड़ा में एक बाघ लगभग 3 महीनों तक वन विभाग की पकड़ से बाहर घूमता रहा। इस दौरान उसने कई पालतू मवेशियों का भी शिकार किया। बड़ी बिल्लियां या बिग कैट कहे जाने वाले ये जीव खतरा बनते जा रहे हैं।

जानकारों इसकी कई वजहें बताते हैं, जैसे:

1. जंगल और आवास का नुकसान: उत्तर प्रदेश में वन क्षेत्रों में कटाई, खनन, और शहरीकरण के कारण जंगली जानवरों का प्राकृतिक आवास कम हो रहा है। उदाहरण के लिए, मिर्ज़ापुर और सोनभद्र जैसे क्षेत्रों में जंगल सिकुड़ रहे हैं, जिससे भालू, तेंदुए, और अन्य जानवर भोजन व पानी की तलाश में शहरों की ओर आ रहे हैं।

 

2. भोजन और पानी की कमी: सूखा, जंगलों में पानी की कमी, और शिकार की कमी के कारण जानवर शहरों में कचरे या मानव बस्तियों के आसपास उपलब्ध भोजन की तलाश में आते हैं।

 

3. मानव-वन्यजीव संघर्ष: बढ़ती आबादी और बस्तियों का जंगलों के करीब विस्तार होने से मानव-वन्यजीव टकराव बढ़ा है। तराई क्षेत्रों में, जैसे पीलीभीत या लखीमपुर खीरी, तेंदुए और बाघ अक्सर गांवों में घुस जाते हैं।

 

4. कचरा और प्रदूषण: शहरों में खुले कचरे और खाद्य सामग्री की उपलब्धता जानवरों को आकर्षित करती है। वाराणसी और लखनऊ जैसे शहरों में बंदरों और जंगली सुअरों की मौजूदगी इसका उदाहरण है।

5 शहरों में भोजन प्रचुर मात्रा में उपलब्ध होना

इससे ही आकर्षित होना शायद जंगली जानवरों का शहर की ओर पलायन संभव है।

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