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मदीना में दज्जाल का महल तैयार?

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मदीना में दज्जाल का महल तैयार?

आजकल सोशल मीडिया पर एक वीडियो काफी वायरल हो रहा है जिसमें दावा किया जा रहा है कि मदीना में दज्जाल का महल तैयार हो चुका है और पैगंबर मुहम्मद ﷺ की हिफाज़त का काम पूरा हो गया है। इस वीडियो को देखकर कई लोगों में डर और चिंता फैल गई है। लेकिन इस बात की तह तक जाना बहुत जरूरी है कि क्या इस दावे में कोई सचाई है या इस्लाम की किताबें, यानी कुरआन और हदीस, हमें इस विषय में स्पष्ट जानकारी देती हैं, जो हमें सही और गलत में फर्क करने में मदद करती हैं।

सबसे पहले बात करते हैं दज्जाल की। इस्लाम में दज्जाल का जिक्र बहुत साफ-साफ हदीसों में मिलता है। पैगंबर ﷺ ने बताया है कि दज्जाल एक बड़ा फितना होगा जो क़यामत से पहले आएगा। वह एक आंख वाला होगा, यानी उसकी एक आंख अंधी होगी। इसके अलावा उसके बारे में कहा गया है कि उसकी एक आंख “फूली हुई अंगूर” जैसी होगी। वह बहुत बालों वाला होगा और उसके पास झूठा जन्नत और झूठा नर्क होगा, जो लोगों को गुमराह करने के लिए होगा। दज्जाल के आने से पहले इस्लाम में ज्ञान की कमी होगी, और लोग बहुत उलझेंगे। हदीसों में बताया गया है कि दज्जाल का प्रभाव करीब 40 दिन तक रहेगा, जिनमें पहला दिन बहुत लंबा होगा, फिर कुछ दिन सामान्य और बाकी दिनों में उसकी मुसीबत कम होगी।

अब सवाल उठता है कि क्या मदीना में उसका कोई महल है? इस बारे में कुरआन या किसी भी विश्वसनीय हदीस में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिलती। न तो पैगंबर ﷺ ने कभी यह कहा कि दज्जाल मदीना में अपना महल बनाएगा, और न ही कोई सहिह हदीस में इसका जिक्र मिलता है। इस्लामी विद्वान इस बात पर सहमत हैं कि दज्जाल के बारे में जो बातें प्रामाणिक हदीसों में हैं, वही हमारी असली मार्गदर्शिका होनी चाहिए। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो अक्सर अफवाहें, गलत व्याख्याएं या नकली क्लिप्स होते हैं, जिन्हें देखकर डरना या बिना जांच-परख के उन्हें सच मानना सही नहीं।

 

कुरआन में भी साफ कहा गया है कि कुछ लोग अल्लाह की आयतों का मजाक उड़ाते हैं और झूठ गढ़ते हैं ताकि लोगों को गुमराह कर सकें। (सूरह अन-नह्ल 16:105) यह हमें सिखाता है कि हमें झूठ फैलाने वालों से सावधान रहना चाहिए। किसी भी दावे को सच मानने से पहले उसकी तहकीक करना जरूरी है। इस्लाम हमें कहता है कि हमें ज्ञान प्राप्त करना चाहिए, अफवाहों से बचना चाहिए और केवल सही स्रोतों से जानकारी लेनी चाहिए।

 

इसलिए, “मदीना में दज्जाल का महल बन गया” जैसी बातें सिर्फ अफवाह हैं। यह इस्लाम के सिद्धांतों और हदीसों के खिलाफ हैं। हमें इस तरह के वीडियो देखकर डरना नहीं चाहिए, बल्कि समझदारी से काम लेना चाहिए। इस्लाम हमें सिखाता है कि डराने वाली बातों से घबराना नहीं चाहिए बल्कि अपने ईमान और ज्ञान को मजबूत करना चाहिए। अफवाहों और झूठे दावों को फैलाना गलत है और इससे बचना चाहिए।

 

अंत में, दज्जाल के विषय में सबसे सही जानकारी वही है जो पैगंबर ﷺ की प्रमाणित हदीसों में मिली है। कोई भी नई बात या दावा जो उनके बयान के विपरीत हो, उसे मानना सही नहीं होगा। हमें चाहिए कि हम धर्म के विद्वानों और प्रमाणित किताबों से ही सीखें और अफवाहों से बचें। इस तरह हम अपने धर्म, अपने ईमान और अपनी सोच को सुरक्षित रख सकते हैं।

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