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उत्तर प्रदेश में विकास की नई उड़ान: कैबिनेट बैठक में एक्सप्रेसवे, औद्योगिक टाउनशिप, रोजगार मिशन समेत कई ऐतिहासिक प्रस्तावों को मिली मंजूरी

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उत्तर प्रदेश में विकास की नई उड़ान: कैबिनेट बैठक में एक्सप्रेसवे, औद्योगिक टाउनशिप, रोजगार मिशन समेत कई ऐतिहासिक प्रस्तावों को मिली मंजूरी

लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार ने बृहस्पतिवार को आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में राज्य की आधारभूत संरचना, औद्योगिक विकास, रोजगार, सामाजिक सुरक्षा और प्रशासनिक दक्षता से जुड़े कई ऐतिहासिक फैसलों को मंजूरी प्रदान की। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में राज्य के आर्थिक, औद्योगिक और सामाजिक विकास को गति देने वाले 12 से अधिक महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर मुहर लगी।कैबिनेट के सबसे महत्वपूर्ण निर्णयों में आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे से पूर्वांचल एक्सप्रेसवे को जोड़ने वाला 49.96 किलोमीटर लंबा प्रवेश नियंत्रित ग्रीनफील्ड लिंक एक्सप्रेसवे शामिल है, जिसे 4775.84 करोड़ रुपये की लागत से ईपीसी मोड पर बनाया जाएगा। छह लेन चौड़े इस एक्सप्रेसवे का विस्तार आठ लेन तक किया जा सकेगा, और इसकी डिजाइन स्पीड 120 किमी प्रतिघंटा होगी। इसके अंतर्गत फ्लाईओवर, रेलवे ओवरब्रिज, इंटरचेंज, दीर्घ सेतु, लघु सेतु समेत कई संरचनाएं विकसित की जाएंगी। यह परियोजना आगरा, लखनऊ, प्रयागराज, वाराणसी और गाजीपुर के बीच आवागमन को त्वरित, सुगम और निर्बाध बनाएगी।इसी बैठक में बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए एक और बड़ा कदम उठाया गया। नोएडा की तर्ज पर एक अत्याधुनिक औद्योगिक टाउनशिप विकसित करने के उद्देश्य से बुन्देलखण्ड इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी एरिया (प्लान विनियमावली-2025) को मंजूरी दी गई है। यह योजना क्षेत्र में नियोजित विकास, सुरक्षित निर्माण, चौड़ी सड़कों, हरित क्षेत्रों और जनसुविधाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करेगी और अप्रत्यक्ष रूप से लाखों लोगों को रोजगार भी देगी।हथकरघा, कुटीर उद्योग और पारंपरिक हस्तशिल्प को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने सभी शासकीय विभागों को उत्तर प्रदेश हथकरघा निगम, खादी ग्रामोद्योग बोर्ड, श्री गांधी आश्रम और अन्य प्रमाणित संस्थाओं से उत्पादित वस्त्रों की अनिवार्य खरीद की व्यवस्था को 31 मार्च 2028 तक बढ़ाने का निर्णय लिया। इससे प्रदेश के लाखों बुनकरों और हस्तशिल्पियों को स्थाई बाजार और बेहतर आर्थिक सहयोग मिलेगा।पूर्व सैनिकों और होमगार्ड्स के पुनः सेवायोजन के लिए भी सरकार ने बड़ा निर्णय लिया है। अब विभिन्न सरकारी विभाग, निकाय और उपक्रम उत्तर प्रदेश पूर्व सैनिक कल्याण निगम लिमिटेड से जेम पोर्टल से इतर सीधे सेवाएं ले सकेंगे। इससे ऐसे प्रशिक्षित कार्मिकों को रोजगार के बेहतर अवसर मिलेंगे।राज्य की सुरक्षा को और अधिक सशक्त बनाने के लिए अयोध्या में एनएसजी हब की स्थापना हेतु गृह मंत्रालय को 99 वर्षों के लिए निःशुल्क 8 एकड़ भूमि आवंटित करने का प्रस्ताव भी स्वीकृत किया गया। इससे अयोध्या और आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों में आतंक-रोधी कार्रवाइयों की त्वरित क्षमता बढ़ेगी।लंबे समय से अधूरी पड़ी जयप्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय केंद्र परियोजना को लखनऊ विकास प्राधिकरण को सौंपने का फैसला भी किया गया। एलडीए इस केंद्र का निर्माण, संचालन व अनुरक्षण करेगा। इस परियोजना में विश्वस्तरीय ऑडिटोरियम, मल्टीपरपज स्पोर्ट्स कोर्ट, मल्टीलेवल पार्किंग और कन्वेंशन सेंटर जैसी सुविधाएं होंगी।राज्य की समेकित वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (IFMS) को अपग्रेड करने के लिए भारत सरकार की वैज्ञानिक संस्था C-DAC को नामांकन के आधार पर अनुबंधित किया गया है। इससे बजट निर्माण, व्यय अनुश्रवण, वेंडर मैनेजमेंट और MIS रिपोर्टिंग को अत्याधुनिक बनाया जा सकेगा।रोजगार क्षेत्र में ऐतिहासिक कदम उठाते हुए सरकार ने ‘उत्तर प्रदेश रोजगार मिशन’ के गठन को मंजूरी दी है। यह मिशन प्रदेश के युवाओं को देश-विदेश में रोजगार के अवसर प्रदान करने, स्किल गैप एनालिसिस, भाषा प्रशिक्षण, कैरियर काउंसलिंग, प्लेसमेंट व पोस्ट-प्लेसमेंट सहायता जैसी सेवाएं देगा।इसके साथ ही निजी विश्वविद्यालय क्षेत्र में डॉ. केएन मोदी विश्वविद्यालय, मोदीनगर को उत्तर प्रदेश निजी विश्वविद्यालय अधिनियम में संशोधन करते हुए सूचीबद्ध करने का निर्णय लिया गया है। विश्वविद्यालय की स्थापना से उच्च शिक्षा में गुणवत्ता व विविधता आएगी।प्रदेश के परिवहन कर ढांचे को आधुनिक बनाने हेतु मोटर यान कराधान अधिनियम-1997 में संशोधन का प्रस्ताव भी मंजूर किया गया है। इसके तहत अब परिवहन वाहनों पर मासिक या वार्षिक कर की जगह एकमुश्त कर व्यवस्था लागू की जाएगी, जिससे राजस्व संग्रहण में वृद्धि होगी।भाषा संस्थान के कर्मचारियों को भी बड़ी राहत देते हुए उनकी अधिवर्षता आयु 58 से बढ़ाकर 60 वर्ष कर दी गई है, जिससे उन्हें सेवा के दो अतिरिक्त वर्ष मिलेंगे।इन फैसलों से यह स्पष्ट है कि उत्तर प्रदेश सरकार राज्य को न केवल देश की सबसे मजबूत क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था बनाना चाहती है, बल्कि इंफ्रास्ट्रक्चर, रोजगार, शिक्षा, औद्योगीकरण और प्रशासन में भी देश के लिए आदर्श मॉडल तैयार कर रही है। ये निर्णय प्रदेश को ‘वन ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी’ के लक्ष्य की दिशा में एक सशक्त कदम सिद्ध होंगे।

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