diwali horizontal

ग्वालपुर में पुरातात्विक धरोहर पर विशेष प्रदर्शनी और व्याख्यान का आयोजन, छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़कर लिया भाग

0 64

ग्वालपुर में पुरातात्विक धरोहर पर विशेष प्रदर्शनी और व्याख्यान का आयोजन, छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़कर लिया भाग

लखनऊ: संस्कृति विभाग उत्तर प्रदेश के तत्वावधान में संचालित उत्तर प्रदेश राज्य पुरातत्व निदेशालय द्वारा प्रदेशव्यापी जनजागरूकता अभियान के अंतर्गत आज 14 जुलाई को लखनऊ जनपद के काकोरी ब्लॉक स्थित ग्वालपुर गांव में एक विशेष छायाचित्र प्रदर्शनी एवं व्याख्यान का आयोजन किया गया। यह आयोजन पुरातत्व विषयक अभिरुचि एवं सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से किया गया।गांव के विद्यालय परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में ग्वालपुर सहित आसपास के ग्रामीण अंचलों के विद्यालयों, इंटर कॉलेजों, महाविद्यालयों के छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और स्थानीय नागरिकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।प्रदर्शनी में उत्तर प्रदेश की समृद्ध पुरातात्विक विरासत को दर्शाते हुए प्रदेश के विभिन्न महत्त्वपूर्ण स्थलों, प्राचीन अवशेषों, उत्खनन स्थलों और संरक्षित धरोहरों के छायाचित्रों को प्रदर्शित किया गया। वहीं व्याख्यान सत्र में प्रतिभागियों को राज्य की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, उसकी ऐतिहासिक महत्ता और पुरातत्व के विभिन्न पक्षों से अवगत कराया गया।पुरातत्व विभाग के अधिकारियों ने विद्यार्थियों को पुरातत्व के क्षेत्र में उपलब्ध अध्ययन पद्धतियों, अनुसंधान की विधियों और संभावित करियर विकल्पों की भी जानकारी दी। व्याख्यान के दौरान यह भी बताया गया कि कैसे प्राचीन धरोहरें हमारी सांस्कृतिक पहचान की नींव हैं और उन्हें संरक्षित रखना प्रत्येक नागरिक का उत्तरदायित्व है।उत्तर प्रदेश सरकार के संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री के नेतृत्व में संस्कृति विभाग और उसकी सहयोगी संस्थाएं निरंतर प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहरों के प्रचार-प्रसार और संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध हैं। ग्रामीण क्षेत्रों तक ऐसी गतिविधियों के विस्तार से न केवल जनसामान्य में इतिहास के प्रति अभिरुचि विकसित हो रही है, बल्कि नई पीढ़ी को भी अपनी विरासत से जुड़ने का अवसर मिल रहा है।उत्तर प्रदेश राज्य पुरातत्व विभाग का यह अभिनव प्रयास न सिर्फ ऐतिहासिक जागरूकता बढ़ाने में सफल हो रहा है, बल्कि यह बच्चों और युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत भी बन रहा है, जो भविष्य में विरासत संरक्षण के वाहक बन सकते हैं।

Leave A Reply

Your email address will not be published.