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डॉक्टरों के अनुसार, सफल किडनी ट्रांसप्लांट वाले मरीज डायलिसिस के मरीजों की तुलना में ज्यादा समय तक जीवित रहते हैं

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लखनऊ : रीनल फेलियर काफी गंभीर अवस्था होती है इसमें पूरी तरह ठीक होने की संभावना भी कम होती है। डॉक्टरों के अनुसार डायलिसिस की तुलना में सफल किडनी ट्रांसप्लांट करा चुके मरीज बेहतर लाइफस्टाइल, मौत का कम खतरा, कम खानपान सम्बन्धी प्रतिबन्ध और बहुत कम इलाज का खर्च वहन करते हैं। किडनी ट्रांसप्लान्टेशन रीनल फेलियर के लिए एक सुरक्षित विकल्प माना जाता है। किडनी ट्रांसप्लांट कराने से अंतिम स्टेज के किडनी के मरीज भी लंबे समय तक जी सकते है और स्वस्थ रह सकते है।
जब किडनी ढंग से अपना काम नहीं करती है तो शरीर के खून में अपशिष्ट पदार्थ, इलेक्ट्रोलाइट्स और अन्य तरल पदार्थ मिल जाते है। डायलिसिस से इन सभी अपशिष्ट पदार्थों को शरीर से बाहर निकाला जाता है। किडनी फेल होने पर डायलिसिस किडनी का काम करता है। हालांकि डॉक्टर अक्सर किडनी ख़राब होने पर किडनी ट्रांसप्लांटेशन कराने की सलाह देते हैं ताकि हर तरह की समस्या से छुटकारा पाने के लिए किडनी को बदला जा सके व स्वस्थ किडनी को ट्रांसप्लांट किया जा सके और बार-बार डायलिसिस न कराना पड़े।
रीजेंसी सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल लखनऊ के कंसलटेंट नेफ्रोलॉजिस्ट- डॉ आलोक पांडे ने इस बारे में कहा, “सफल किडनी ट्रांसप्लांट वाले मरीज डायलिसिस मरीजों की तुलना में ज्यादा समय तक जीवित रहते हैं। किडनी फेलियर पर की गयी एक रिसर्च के मुताबिक विश्व स्तर पर क्रोनिक किडनी बीमारी से सालाना लगभग 735,000 मौतें होती है। भारत में लगभग 151 और 232 प्रति मिलियन लोग हैं जिन्हें किडनी ट्रांसप्लान्ट की जरुरत है। यहां प्लस प्वाइंट यह है कि किडनी का दान मृत और जीवित व्यक्ति दोनों ही कर सकते हैं। मेडिकल साइंस  में हो रही निरंतर प्रगति ने ट्रांसप्लांट और सर्जरी में होने वाली तमाम मुश्किलों और चुनौतियों को ख़त्म कर दिया है। सीकेडी मरीजों के लिए किडनी ट्रांसप्लांट कराने का यह बेहतरीन समय है। अब ट्रांसप्लांट्स सेंटर पर ज्यादा मरीज भी आ रहे हैं।”
डॉ आलोक पांडे ने आगे बताते हुए कहा, “हमारे देश में अंगदान पर अभी तक ज्यादा ध्यान नहीं दिया जाता है क्योंकि बहुत से लोग सामाजिक कलंक की वजह से अंगदान करने से कतराते हैं। अंतिम संस्कार को लेकर हमारे यहाँ कुछ ऐसे रीति-रिवाज हैं जिससे अंगदान को बढ़ावा नही मिलता है। मरने के बाद मृतकों को दफनाने या जलाने के बाद बहुत सारे अनुष्टान किये जाते हैं इस वजह से लोग अंगदान को अहमियत नहीं देते हैं और अंगदान को लेकर लोगों में कई गलत जानकारियाँ भी फैली हुई है। अंगदान की प्रक्रिया में व्यक्ति अपने जिन्दा रहते हुए एक सरल प्रक्रिया के माध्यम से अंगदान की स्वीकृत देता है लेकिन मृतक के परिवार अक्सर अंगदान से पीछे हट जाते हैं। अगर अंगदान के प्रति प्रोत्साहन किया जाए तो कई जिंदगियां बचाने में मदद मिल सकती है।”
किडनी ट्रांसप्लांट को ढंग से अंजाम देने के लिए शरीर का स्वस्थ होना बहुत जरूरी होता है। ट्रांसप्लान्टेशन के लिए या ट्रांसप्लान्टेशन का इतंजार करते समय या उससे बहुत पहले मरीज का स्वस्थ तथा फिट होना बहुत जरूरी होता है। जब मरीज ठीक रहता है तो ट्रांसप्लान्टेशन के बाद जल्दी सामान्य हो सकता है और अपने रोजमर्रा के कामों को बिना किसी रुकावट के कर सकता है।
समय पर दवाएं, उचित खानपान और नियमित एक्सरसाइज करने, धूम्रपान और शराब का सेवन न करने, नियमित जांच, शारीरिक गतिविधियों को करने, आराम करने और प्रकृति के करीब रहने से किडनी की बीमारी होने से बचा जा सकता है और इन सब चीजों का पालन उन मरीजों को भी करना चाहिए जो किडनी बीमारी से पीड़ित होते हैं और वे किडनी ट्रांसप्लांट का इन्तजार कर रहे होते है।
अंतिम स्टेज की किडनी बीमारी वाले मरीजों के लिए किडनी ट्रांसप्लांट कराना उपयुक्त होता है। सफल ट्रांसप्लांटेशन से जीवन सामान्य बनाया जा सकता है और बीमारी के ख़तरे को कम किया जा सता है। डायलिसिस प्रक्रियाओं में घंटों  समय और पैसों को खर्च करना पड़ता है जबकि ट्रांसप्लांट में एक ही बार में स्थायी समाधान मिलता है। सालों से डॉक्टरों और विशेषज्ञों ने डायलिसिस कराने की बजाय ट्रांसप्लान्टेशन को महत्व दिया है।डॉक्टरों के अनुसार, सफल किडनी ट्रांसप्लांट वाले मरीज डायलिसिस के मरीजों की तुलना में ज्यादा समय तक जीवित रहते हैं
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