
लखनऊ में 250 अवैध होटल पर गिरी गाज, नोटिस जारी।
मोहन होटल आग प्रकरण: चारबाग स्थित मोहन होटल में शनिवार रात लगी आग ने एक बार फिर लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) की लापरवाही को उजागर कर दिया है। LDA के पास पिछले 7 वर्षों से 250 अवैध होटलों की सूची मौजूद है, जिन पर सीलिंग और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई होनी थी। लेकिन, आज तक फाइलें धूल फांक रही हैं।
17-18 मई की रात चारबाग स्थित मोहन होटल में आग लग गई थी। इसमें 30 लोगों की जान सांसत में फंस गई थी। कोई बड़ा हादसा होने से टल गया। इससे पहले 2018 में चारबाग के ही होटल में 7 लोगों की मौत हो गई थी। इसके बावजूद प्रशासन निष्क्रिय है, जिसने एक बार फिर शहर को खतरे में डाल दिया है। उस हादसे के बाद LDA ने उस इलाके का सर्वे कर उन 250 होटलों की सूची तैयार की थी जो बिना किसी मानक के चल रहे थे।

आदेश हुआ था कि एक महीने के भीतर इन होटलों पर सख्त कार्रवाई की जाए, लेकिन 7 साल बाद भी फाइलें जस की तस पड़ी हैं। अग्निकांड के बाद LDA के 16 इंजीनियरों और कई बाबुओं को दोषी पाया गया था। सभी को चार्जशीट जारी कर दी गई थी। इसके बाद मामले की दोबारा जांच आवास आयुक्त के निर्देश पर हुई, जिसमें भी इंजीनियर और बाबू दोषी पाए गए।
तत्कालीन प्रमुख सचिव आवास विभाग नितिन रमेश कोकर्ण ने कार्रवाई की जिम्मेदारी आवास विकास परिषद के आयुक्त को सौंपी। कुछ इंजीनियरों को निलंबित किया गया, लेकिन समय बीतने के साथ कई जेई और बाबू बहाल भी हो गए। जिन होटलों में फायर एग्जिट तक नहीं हैं, वे शहर में खुलेआम चल रहे हैं और किसी बड़ी दुर्घटना को न्योता दे रहे हैं। प्रशासन की लापरवाही का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। अब सवाल यह है कि क्या किसी नई दुर्घटना का इंतजार किया जा रहा है? या फिर कार्रवाई की फाइलें यूं ही धूल फांकती रहेंगी। जवाबदेही तय न होने तक सिस्टम में सुधार संभव नहीं दिख रहा।