
UP में SIR प्रक्रिया पर अखिलेश यादव का बड़ा बयान!
उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची सुधार (SIR) प्रक्रिया को लेकर राजनीति फिर गर्म हो गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष *अखिलेश यादव* ने चुनाव आयोग से इस प्रक्रिया की अवधि बढ़ाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि *उत्तर प्रदेश बहुत बड़ा राज्य है, यहाँ **करोड़ों लोग अपने नाम मतदाता सूची में जुड़वाने और अपडेट कराने की कोशिश कर रहे हैं*, लेकिन चुनाव आयोग की ओर से इस बार तैयारियां पूरी तरह अधूरी लग रही हैं।
अखिलेश यादव का कहना है कि इस समय पूरे प्रदेश में *शादियों व अन्य वैवाहिक कार्यक्रमों का मौसम चल रहा है, जिसकी वजह से बहुत से लोग अपने घरों से बाहर रहते हैं। ऐसे में उन्हें अपने नाम अपडेट कराने का अवसर नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को चाहिए कि वह **SIR प्रक्रिया को कम से कम तीन महीने और बढ़ाए*, ताकि हर नागरिक को अपना वोट बनवाने का पर्याप्त मौका मिल सके।
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष ने यह भी कहा कि राज्य में काम कर रहे *बीएलओ (ब्लॉक लेवल ऑफिसर)* और राजनीतिक पार्टियों के *बीएलए (ब्लॉक लेवल एजेंट)* को सही तरीके से ट्रेनिंग ही नहीं दी गई है। कई जगह लोगों को प्रक्रिया की जानकारी सही रूप में नहीं दी जा रही है। इसकी वजह से हजारों लोग अपने नाम जुड़वाने या गलतियों को सुधारने में परेशान हो रहे हैं।
अखिलेश ने आरोप लगाया कि यदि तैयारी पूरी नहीं होगी तो लाखों मतदाता वोट बनाने से वंचित रह जाएंगे। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र तभी मजबूत होगा जब हर नागरिक का नाम मतदाता सूची में हो और उसे वोट डालने का अधिकार मिले। इसलिए आयोग को चाहिए कि वह सभी जिलों में बैठकें करे, व्यवस्था दुरुस्त करे और SIR प्रक्रिया को बढ़ाकर प्रदेश की जनता को सुविधा दे।
उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी लोगों की मदद के लिए अपने स्तर पर प्रयास कर रही है, लेकिन सही दिशा में काम चुनाव आयोग को करना होगा। “हम चाहते हैं कि प्रदेश का हर नागरिक अपना वोट जरूर बनवाए। अगर वोट ही नहीं बनेगा, तो लोकतंत्र कैसे मजबूत होगा?”—अखिलेश ने कहा।
प्रदेश में आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए SIR प्रक्रिया बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस प्रक्रिया के तहत पुराने वोटों को अपडेट किया जाता है, मृतक मतदाताओं के नाम हटाए जाते हैं और नए नाम जुड़ते हैं। ऐसे में समय कम होने से बड़ी संख्या में लोगों के वोट छूटने की आशंका जताई जा रही है।
हालांकि चुनाव आयोग ने अभी इस मामले में किसी तरह की आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन विपक्ष की यह मांग अब राजनीतिक चर्चा का बड़ा मुद्दा बन गई है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि आयोग इस मांग पर क्या कदम उठाता है।