
लखनऊ : मुख्यमंत्री से लेकर डीजीपी कितने भी निर्देश दे दें कि पीड़ित (फरियादी) के थाने पहुंचते ही वहां बैठे पुलिस कर्मी तत्काल उसकी सुनवाई करें। रिपोर्ट दर्ज करने से लेकर जो भी मदद हो तत्काल करें वंही कई बार मुख्यमंत्री और डीजीपी ने सख्त निर्देश दिया कि अगर फरियादी थाने आये तो उसे सम्मानपूर्वक कुर्सी दी जाए और सभी थानेदार विनम्रता से बात करें लेकिन सभी नियम धरे के धरे रह गए।
लेकिन राजधानी में ही इन सभी आदेशों का क्या हुआ इसका अंदाजा आप इसी फोटो से लगा सकते है। जागरण सिटी की टीम ने एक इन्वेस्टीगेशन किया जिसमे यह आपके सामने है यह सीन अमीनाबाद कोतवाली का है। जंहा संवाददाता मजदूर के वेश में दो हजार रुपये की रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए पहुंचे। पुलिस का जो व्यवहार था वह बहुत शर्मसार कर देने वाला रहा। संवाददाता की रिपोर्ट दर्ज नहीं की उसे गालियां दी। जमीन पर बैठाया और फिर मारो इसको कहकर भगा दिया।