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लखनऊ में “जातिगत जनगणना और मुसलमान” विषय पर ऑल इंडिया दलित मुस्लिम मोर्चा का महत्वपूर्ण सेमिनार आयोजित

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प्रेस विज्ञप्ति

लखनऊ ,दिनांक 22 जून, ‘ऑल इंडिया दलित मुस्लिम मोर्चा’ के तत्वाधान में “जातिगत जनगणना और मुसलमान” विषय पर एक सेमिनार का आयोजन प्रेस क्लब लखनऊ में हुआ ।

सेमिनार में मुख्य वक्ता एवं संयोजक, मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष सलाहउद्दीन शीबू एडवोकेट थे सहसंयोजक मोहम्मद रफी एडवोकेट अध्यक्ष ‘नागरिक अधिकार परिषद’ ने सेमिनार का संचालन किया ।

सेमिनार में मुस्लिम सूफी स्कॉलर बाबर अशरफ, वरिष्ठ पत्रकार अमन अब्बास, रिटायर्ड आईएएस अनीस अंसारी , पूर्व डीजीपी रिजवान अहमद, सुल्तान शाकिर हाशमी, अरशद आज़मी, सर्वेश सोनकर, वसीम हैदर , प्रदीप सिंह, मोहम्मद अहमद राइनी ने अपने विचार रखे ।

 

सेमिनार को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता सलाहउद्दीन शीबू ने केंद्र सरकार के ‘जातिगत जनगणना’ कराई जाने के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि सन 1881 से 1931 तक देश में जातिगत जनगणना कराई जाती थी लेकिन देश की नेहरू सरकार ने तत्कालीन परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए जनगणना अधिनियम 1948 में संशोधन कर जातिगत जनगणना खत्म कर दी लेकिन आज जातिगत जनगणना समय की आवश्यकता है ।

उन्होंने कहा – कुछ लोग साज़िशन सोशल मीडिया व अन्य प्रचार माध्यमों के जरिए मुसलमान को जातिगत जनगणना में कौमी एकता दर्शाये जाने का हवाला देकर जाति के स्थान पर मुस्लिम शब्द लिखे जाने की सलाह दे रहे हैं जबकि सरकारी सतह पर मुसलमानों की जातिवार सूची में अंसारी, मंसूरी, राइनी, फकीर, शेख, सैयद ,पठान आदि जातियां हैं मुस्लिम नाम की कोई जाति नहीं है मुसलमान के एक बड़े तबक़े को संविधान के अनुच्छेद 340 / 342 और ईडब्लूएस के तहत आरक्षण व अन्य सुविधाएं मिलती हैं यदि भूल से वह जाति के कॉलम में मुस्लिम शब्द लिख देगा तो भविष्य में वह आरक्षण व अन्य सुविधाओं से वंचित हो जाएगा ।

 

उन्होंने कहा कि यह सही है कि मुसलमानों में धर्म के आधार पर सब बराबर है लेकिन जिस समाज में हम रहते हैं वहां जाति-व्यवस्था है और मुसलमान भी इस बीमारी से ग्रसित हैं विडंबना यह है कि अल्लाह एक, रसूल एक, कुरान एक फिर भी मुसलमान वैचारिक मतभेद के चलते फिरको में बंटे हैं इसलिए मैं मुसलमानों से अपील करता हूं की ‘जातिगत जनगणना’ में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें और अपन सही जातीय विवरण दर्ज करायें।

उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की की जनगणना अधिनियम 1948 में संशोधन का बिल लाकर एक्ट में जाति का कॉलम जुड़वाया जाये ताकि जातिगत जनगणना में वैधानिक बाधा न आए और इसे सार्वजनिक किया जा सके अन्यथा इसका भी 2011 की जनगणना जैसा ही हाल होगा । सहसंयोजक मोहम्मद रफी एडवोकेट ने कहा कि मुसलमानो की बहुत बड़ी आबादी झोपड़-पट्टी में रहती है और अक्सर जनगणना में इनका विवरण दर्ज नहीं हो पाता । आने वाले समय में जातिगत जनगणना नेशनल पापुलेशन रजिस्टर का आधार भी बन सकती है इसलिए मुसलमानको को पूरी जिम्मेदारी के साथ जातिगत जनगणना में अपनी सही जाति और विवरण दर्ज करना चाहिए यह भी संभावना है कि जातिगत जनगणना के बाद आरक्षण का दायरा बढ़ाया जाए जिससे मुसलमानों के एक बड़े तबके को लाभ हो सकता है ।

सेमिनार में बोलते हुए वरिष्ठ पत्रकार अमन अब्बास ने कहा ‘फैलाए जाने वाले कन्फ्यूजन का शिकार न हो जाति के कॉलम में अपनी जाति का नाम भरे । ऑल इंडिया मोहम्मदी मिशन के सूफी बाबर अशरफ ने कहा ” जातिगत जनगणना को लेकर जो लोग कन्फ्यूजन फैला रहे हैं उनके पास नॉलेज है लेकिन विज़डम नहीं है ” पत्रकार और प्लानिंग कमीशन के पूर्व सदस्य सुल्तान शाकिर हाशमी ने कहा” जाति के कॉलम में अपनी जाति लिखें इससे अगर फायदा होता है तो हमें यह फायदा लेना चाहिए ”
सेमिनार में बोलते हुए राजनीतिक कार्यकर्ता अरशद आज़मी ने कहा आवश्यकता है कि जो लोग जाति के कॉलम में मुसलमान लिखने की बात कर रहे हैं उनसे डेलिगेशन की शकल में मिला जाए ।” सेमिनार की अध्यक्षता कर रहे पूर्व आईएएस अधिकारी अनीस संसारी ने कहा ” जाति के कॉलम में मुस्लिम लिखना अपने आप को धोखा देना है लोगों को चाहिए कि वह इस धोखे में न आएं और अपने जाति के कॉलम में अपनी असल बिरादरी लिखें । ”

सेमिनार के के अंत में मोर्चा के राष्ट्रीय महासचिव एजाज़ राइनी ने सभी का आभार व्यक्त किया । सेमिनार में मुख्य रूप से मोहम्मद फैसल, फज़ल बेग एडवोकेट , अरशद सफीपूरी आदि लोग मौजूद रहे ।

 

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