
नई दिल्ली:अराकान आर्मी नाम का विद्रोही गुट राखिने और चिन राज्यों में जुंटा सेना को लगातार पीछे धकेल रहा है। ये दोनों राज्य भारत की सीमा से सटे हैं। इसी बीच कई पड़ोसी देशों के अधिकारियों ने बैंकॉक में म्यांमार की सैन्य सरकार के प्रतिनिधियों से बातचीत की।
बैंकॉक बैठक में भारत, चीन, बांग्लादेश, थाईलैंड के अधिकारियों ने सहमति जताई कि म्यांमार के साथ सीधा जुड़ाव महत्वपूर्ण और जरूरी है। थाईलैंड के विदेश मंत्री मारिस संगिआम्पोंगसा ने यह जानकारी दी। म्यांमार के विदेश मंत्री थान स्वे ने सभा को सैन्य सरकार के राजनीतिक रोडमैप के बारे में बताया, जिसमें अगले साल होने वाले चुनाव भी शामिल हैं। विद्रोहियों का दावा है कि चिन राज्य में लगभग 200 सैनिकों ने आत्मसमर्पण कर दिया है। जुंटा अभी भी रखाइन राज्य की राजधानी सित्तवे पर काबिज है,जहां भारत की ओर से निर्मित बंगाल की खाड़ी में एक बंदरगाह है। अगर अराकान आर्मी सित्तवे पर कब्जा करने की कोशिश करती है,तो जुंटा अपनी वायु सेना का इस्तेमाल कर सकता है। सित्तवे सामरिक रूप से जुंटा और भारत दोनों के लिए महत्वपूर्ण है।
राखिने और चिन राज्यों में जुंटा के सैन्य ठिकाने लगातार अराकान आर्मी के हाथों में जा रहे हैं। इससे म्यांमार में हालात और बिगड़ने की आशंका है। भारत के लिए भी यह चिंता का विषय है क्योंकि ये दोनों राज्य भारत की सीमा से लगते हैं। चीन की भूमिका भी यहां अहम है। क्याउफ्यु बंदरगाह चीन के लिए बहुत महत्वपूर्ण है और वह अपनी प्राइवेट मिलिटरी कंपनी के जरिये इसकी रक्षा कर रहा है।