
चारबाग रेलवे स्टेशन पर आशा वर्कर्स ने किया उग्र प्रदर्शन।
लखनऊ: लखनऊ में चारबाग रेलवे स्टेशन पर आशा वर्कर्स ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। उत्तर प्रदेश आशा वर्कर्स यूनियन से सम्बद्ध आल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियन के बैनर तले प्रदेश भर से आशा वर्कर्स पहुंचीं। उन्होंने अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी की। आशा वर्कर्स का कहना है कि 5 सूत्रीय मांगों को लेकर लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं, मगर कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
भीषण ठंड में यूपी के 75 जनपदों से आईं आशा वर्कर्स चारबाग रेलवे स्टेशन पर जुटी। वे स्टेशन से पैदल विधानसभा की ओर कूच करने वाली थीं। इससे पहले ही पुलिस पहुंच गई। 4 थानों की फोर्स ने सभी आशा वर्कर्स को चौतरफा बैरिकेडिंग करके रोक लिया।

चारबाग से निकलने के लिए आशा वर्कर से काफी संघर्ष और हंगामा किया, मगर पुलिस ने किसी भी आशा वर्कर को आगे नहीं बढ़ने दिया। इस दौरान आशा वर्कर्स ने नारा लगाया – 2 हजार में दम नहीं, 20 हजार से कम नहीं। फिलहाल सभी आशा वर्कर्स चारबाग रेलवे स्टेशन पर बैठी हैं। लगातार नारेबाजी कर रही हैं।
आशा वर्कर्स की 5 सूत्रीय मांग
1- आशा वर्कर्स को 45/46 वे भारतीय श्रम सम्मेलन की सिफारिशों के अनुरूप राज्य स्वास्थ्यकर्मी का दर्जा देकर न्यूनतम वेतन, मातृत्व अवकाश, ईएसआई, भविष्य निधि, ग्रेच्युटी और पेंशन गारंटी दी जाए।
2-10 लाख का स्वास्थ्य बीमा और 50 लाख का जीवन बीमा गारंटी दी जाए।
3- आशा वर्कर्स के काम के घंटे तय किए जाएं।
4-2017 से अब तक के लम्बित भुगतानों का आकलन कर उसका भुगतान किया जाए।
5- सेवानिवृत्ति पर ग्रेच्युटी का भुगतान किया जाए।
दूसरे के बच्चों का इलाज करवाते हैं] अपनों का नहीं कर पा रहे हैं’
कानपुर से आईं आशा वर्कर नीतू दीक्षित ने कहा-2006 से सेवा दे रही हूं। इस भीषण ठंड में आना हमारी मजबूरी है। हम लोग पहले से ही सड़कों पर हैं। अब यहां
दूसरे के बच्चों का इलाज करवाते हैं] अपनों का नहीं कर पा रहे हैं’
कानपुर से आईं आशा वर्कर नीतू दीक्षित ने कहा-2006 से सेवा दे रही हूं। इस भीषण ठंड में आना हमारी मजबूरी है। हम लोग पहले से ही सड़कों पर हैं। अब यहां पहुंचकर अपने अधिकार के लिए लड़ रहे हैं। गुहार लगा रहे हैं। ₹2000 वेतन मिलता है, जिसमें अपने बच्चों का लालन-पालन करना बेहद मुश्किल हो गया है। ना तो बच्चों को अच्छी शिक्षा दे पा रहे हैं और ना ही बीमार होने पर समय पर इलाज करवा पाते हैं।
दूसरे बच्चों की जिंदगी बनाने वाले हम लोग अपने बच्चों का जीवन नहीं सुधर सकते हैं। ₹2000 जो हमको मिलते हैं, इसमें कोई अधिकारी कर्मचारी गुजारा करके दिखाएं। हमारे दो बच्चे हैं। ठीक से उनकी पढ़ाई नहीं हो पाई। आज वह नौकरी के लिए भटक रहे हैं। हमारे इलाज के लिए कोई सुविधा नहीं है हम लोगों का आयुष्मान कार्ड से भी इलाज नहीं हो पा रहा। हम सब का इलाज करते हैं, मगर अपना इलाज नहीं करवा पा रहे हैं।