
धर्मनिरपेक्षता पर हमला राहुल गांधी
नई दिल्ली: मुल्क की सियासत एक बार फिर गर्म हो चुकी है। इस बार मामला है भारत की सेक्युलर पहचान यानी “धर्मनिरपेक्षता” पर हो रहे मुमकिना हमले का। कांग्रेस के सीनियर लीडर राहुल गांधी और राजद के नेता तेजस्वी यादव ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीधा इल्ज़ाम लगाया कि मौजूदा हुकूमत संविधान को बदलने की साज़िश कर रही है।
राहुल गांधी ने कहा:
“ये सिर्फ संविधान का मामला नहीं है, ये हिंदुस्तान की रूह का सवाल है। जो लोग संविधान को बदलने की बातें कर रहे हैं, वो दरअसल मुल्क की बुनियाद पर हमला कर रहे हैं। हम उन्हें ये हरगिज़ नहीं करने देंगे।”
उन्होंने ये भी कहा कि कुछ हुकूमती हलकों और कट्टर सोच रखने वाले अफ़राद की तरफ़ से हिंदू राष्ट्र की बातें सामने आ रही हैं, जो भारत की धर्मनिरपेक्ष पहचान के ख़िलाफ़ हैं।
तेजस्वी यादव का बयान भी सख़्त था:
“बाबा साहब आंबेडकर ने जो संविधान हमें दिया, वो तमाम मज़हबों, जातियों और तबक़ों को बराबरी का हक़ देता है। जो लोग इसे बदलना चाहते हैं, वो दरअसल मुल्क की एकता को तोड़ना चाहते हैं। संविधान को छूने का ख्याल भी दिल में मत लाना!”
हाल ही में कुछ वुज़रा (मंत्रियों) के बयान सामने आए, जिनमें कहा गया कि संविधान में बदलाव की ज़रूरत है। इसी बयानबाज़ी ने विपक्ष को सरकार पर हमला करने का मौक़ा दे दिया। हुकूमत की तरफ़ से तो अभी तक कोई सरकारी तजवीज़ (प्रस्ताव) नहीं आई, लेकिन विपक्ष का दावा है कि ये सब एक सोची-समझी स्कीम के तहत हो रहा है।
राहुल गांधी ने इल्ज़ाम लगाया कि हुकूमत की नीयत ये है:
आरक्षण यानी रिज़र्वेशन को धीरे-धीरे खत्म किया जाए
“धर्मनिरपेक्ष” शब्द को संविधान से हटाया जाए
अदालतों की आज़ादी में दखल दिया जाए
एक मज़हब को बाक़ियों पर तरजीह दी जाए
हुकूमत की जानिब से अभी कोई रेस्मी (औपचारिक) बयान नहीं आया, लेकिन बीजेपी के कुछ नेताओं ने इन इल्ज़ामात को “झूठा” और “गुमराह करने वाला” बताया है। उनका कहना है कि:
हम संविधान का पूरा एहतराम करते हैं। ना कोई उसे बदलेगा, ना बदलने दिया जाएगा। विपक्ष सिर्फ अवाम को डराने की कोशिश कर रहा है।”
सोशल मीडिया पर ये मसला बड़ी तेजी से चर्चा में है। आम लोग, समाजी कारकुन (सामाजिक कार्यकर्ता), और स्टूडेंट्स ग्रुप्स हुकूमत से वाज़ेह जवाब मांग रहे हैं। कुछ जगहों पर छोटे-छोटे एहतजाजी इजलास (प्रदर्शन) भी देखने को मिले हैं।
जल्द ही मानसून सेशन शुरू होने वाला है, और ये मसला पार्लियामेंट में भी गरमाया जा सकता है। अगर विपक्ष ने इस बार वाक़ई एकजुट हो कर मोर्चा संभाल लिया, तो हुकूमत को इसको संभालना आसान नहीं होगा।संविधान हमारी रीढ़ है। जो इसे छेड़ेगा, हम उसके खिलाफ सड़कों पर भी उतरेंगे और सदन में भी जंग लड़ेंगे।”