
पटाखा बनाने पर रोक ;सुप्रीम कोर्ट
इंडिया Live: देशभर में त्योहारों पर पटाखों (firecrackers) के प्रचुर उपयोग को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि “उत्सव किसी की सेहत की कीमत पर नही हो सकता।” कोर्ट ने यह भी बताया कि जिसकी वजह से हवा प्रदूषित होती है और बच्चों‑बुज़ुर्गों को गंभीर नुकसान पहुँचता है,

उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसके तहत कोर्ट ने ऐसे पटाखों पर पाबंदी लगाने और राज्य सरकारों से निर्देशों का पालन सुनिश्चित कराने को कहा है। पटाखा प्रतिबंध का विरोध बीजूबीजेपी समेत अन्य राजनीतिक दलों ने पिछले साल किया था; उनका कहना था कि यह धार्मिक एवं सांस्कृतिक आज़ादी का हनन है। दूसरी ओर, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पर आरोप है कि उन्होंने Durga Puja पंडाल आयोजकों को कहा है कि पंडालों में माँ दुर्गा की मूर्ति के पास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर लगाई जाए, ताकि देवी के चरणों में उन पर शुभकामनाएँ बरसें। इस प्रस्ताव ने राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है; आम आदमी पार्टी और अन्य विपक्षी दल इसे धर्म की राजनीति में हस्तक्षेप और सांस्कृतिक त्योहारों का राजनीतिकरण बताया है, जबकि भाजपा का कहना है कि यह केवल आदर प्रदर्शन है और कोई ज़रूरी आदेश नहीं है। जनता में यह सवाल उठ रहा है

कि क्या धार्मिक भावना और त्योहार की परंपराएँ सुरक्षित रहेंगी, या राजनीति इन्हें साधन बना देगी? पटाखों के प्रतिबंध से जुड़े कोर्ट के तर्क—स्वास्थ्य, बचाव और संविधान की गारंटी के अधिकार के तहत—और त्योहारों में धार्मिक भावना की रक्षा की मांग दोनों के बीच संतुलन की कोशिश जारी है।—