
अमित शाह ने कतरे नितीश कुमार के पर!
इंडिया Live:बिहार की नई सरकार बने अभी कुछ ही घंटे हुए थे कि एक घटना ने पूरा राजनीतिक माहौल बदल दिया। दिल्ली में हुए एक बड़े कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह एक साथ मंच पर थे। यहां नीतीश कुमार ने अचानक सबके सामने कहा— “मुझसे दो बार गलती हो गई थी।” यह बयान उन्होंने अमित शाह की मौजूदगी में दिया, और यही बात अचानक राजनीति का सबसे बड़ा मुद्दा बन गई।

नीतीश कुमार अपनी राजनीति में बेहद सधी हुई भाषा का इस्तेमाल करते हैं। इसीलिए जब उन्होंने सार्वजनिक मंच से “गलती” मान ली, तो इसे सिर्फ एक सामान्य बयान नहीं माना गया। विश्लेषकों के अनुसार, यह नीतीश की मजबूरी, दबाव या कमजोर राजनीतिक स्थिति का इशारा हो सकता है। कई लोग मानते हैं कि इस मंच का समय और माहौल देखकर ऐसा लगा कि अमित शाह ने एक तरह का संदेश दिया—कि बिहार सरकार भले ही नीतीश के नेतृत्व में हो, लेकिन असली ताकत दिल्ली के पास है।
इस बयान के तुरंत बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा बढ़ गई कि गठबंधन की सत्ता का संतुलन अब पूरी तरह BJP की ओर झुक रहा है। JDU के कुछ नेताओं ने कहा कि “अब तस्वीर साफ हो गई है” और नीतीश आगे भी गठबंधन के नियमों के अनुसार ही चलेंगे। वहीं कुछ नेताओं ने यह भी माना कि नीतीश का यह बयान BJP की बढ़ती पकड़ का संकेत है।

यह भी चर्चा में है कि अमित शाह की राजनीति आमतौर पर किसी बड़े भाषण या खुले ऐलान पर निर्भर नहीं होती। वे माहौल बनाकर, मंच चुनकर और समय तय करके राजनीतिक संदेश देते हैं। इस मामले में भी, नीतीश का बयान लोगों को यह महसूस कराने लगा कि सत्ता का असली नियंत्रण अब धीरे-धीरे BJP की तरफ जा रहा है।
बिहार की राजनीति में इस घटना के बाद दो बड़े बदलाव साफ दिखाई देने लगे—
पहला, गठबंधन के भीतर BJP की पकड़ और मजबूत होती दिखी।
दूसरा, नीतीश कुमार की स्वतंत्र राजनीतिक ताकत कमज़ोर पड़ती महसूस हुई।
राजनीति में कई बार बिना कोई घोषणा किए, सिर्फ़ माहौल बना देने से ही संतुलन बदल जाता है। यहां भी ऐसा ही हुआ। सरकार के पहले दिन ही अमित शाह ने कोई बड़ा बयान नहीं दिया, लेकिन नीतीश के एक वाक्य ने यह साफ कर दिया कि आने वाले समय में फैसलों की दिशा और नियंत्रण किसके हाथ में होगा।
इस एक ही पल से यह संदेश फैल गया कि बिहार की सरकार चलाने में अब नीतीश अकेले निर्णायक नहीं होंगे, बल्कि हर बड़ा कदम दिल्ली, यानी BJP की राजनीतिक रणनीति के मुताबिक़ ही तय किया जाएगा। इसी वजह से कहा जा रहा है कि सरकार की शुरुआत में ही सत्ता का संतुलन बदल गया—खामोशी से, लेकिन बहुत प्रभावी तरीके से।