
उन्नाव। रेप व हत्या के जघन्य मामले में सजायाफ्ता भाजपा के पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की पत्नी निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष संगीता सेंगर को जिला पंचायत सदस्य निर्वाचन क्षेत्र ब्लाक फतेहपुर चैरासी से भाजपा हाईकमान द्वारा प्रत्याशी घोषित किया जाना भाजपा के लिए भारी पड़ गया है। इस पर मीडिया तंत्र में सवाल उठते ही जनमानस में भाजपा को लेकर हो रही किरकिरी से पार्टी हाईकमान ने पलटी मार संगीता सेंगर की उम्मीदवारी को रद्द कर दिया है। फज़हत को चलते प्रदेश भाजपा अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह को स्वयं सामने आकर संगीता सेंगर की पार्टी से प्रत्याशिता रद्द करने की जानकारी प्रेस को देनी पड़ी।
याद रहे की माखी की अवयस्क दुष्कर्म पीड़िता लड़की ने सजायाफ्ता पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की पत्नी संगीता सेंगर को भाजपा द्वारा प्रत्याशी बनाये जाने पर तीव्र असंतोष जाहिर किया था। पीड़िता का आरोप है कि इससे सेंगर के परिवार को भाजपा व सरकार का संरक्षण मिलेगा। इसके विरूद्व उसने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजकर विरोध दर्शाये जाने की जानकारी मीडिया को दी थी। समझा जाता है कि दुष्कर्म पीड़िता के असंतोष एवं जनमानस में नीति और नियत को लेकर उठ रहे सवाल पर भाजपा ने प्रत्याशिता रद्द कर सवालो को विराम दे दिया है।
भाजपा के पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को सियासी नब्ज पहचानने में जो महारथ हासिल रही उससे उन्होने अपनी पत्नी संगीता सेंगर को मियांगंज ब्लाक क्षेत्र से पहले जिला पंचायत सदस्य चुनाव में जीतवाया फिर सपा से विधायक होने का लाभ उठाकर जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में उतारा। जिसमें संगीता सेंगर ने सीधे मुकाबले में लाॅटरी के निर्णय से विजय हासिल की। इस मुकाबले में पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष ज्योति रावत को पराजय का सामना करना पड़ा। ज्योति रावत हरदोई से भाजपा के सांसद जयप्रकाश रावत की पत्नी है। जय प्रकाश रावत मूलतः इसी जनपद के गांव मुंडा के निवासी है। कुलदीप सिंह सेंगर को सजा होने के बाद रिक्त बांगरमऊ विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव में उनकी पत्नी संगीता सेंगर ने टिकट के लिए भाजपा में काफी प्रयास किए, किंतु सफल नहीं रही। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव का मौके आने पर उन्होने अपने पति सेंगर की सियासी राजनीति का वास्ता देकर बांगरमऊ से टिकट फतेहपुर चैरासी ब्लाक की तृतीय सीट से टिकट मांगा था। जिसमें भाजपा हाईकमान ने उनको तीन दिन पहले ही पार्टी से प्रत्याशी घोषित किया। इसके बाद से ही मामला सुर्खियों में रहा बल्कि भाजपा के नेताओं में भी अंदर-अंदर इसे लेकर असंतोष रहा कि कही कुलदीप सिंह सेंगर का मुद्दा उछालकर विपक्षी दल लाभ न हासिल कर ले।