
रहीमाबाद में जमीन विवाद को लेकर युवक की निर्मम हत्या, छह नामजद आरोपियों की तलाश में जुटी पुलिस
लखनऊ: राजधानी के रहीमाबाद थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम बख्तौरीपुर में जमीन के पुराने विवाद को लेकर मंगलवार की सुबह एक दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई, जिसमें 32 वर्षीय युवक अमन दीक्षित की बीती रात बेरहमी से हत्या कर दी गई। मृतक के परिजनों की तहरीर पर पुलिस ने छह लोगों को नामजद करते हुए हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए टीमें गठित कर छापेमारी शुरू कर दी गई है।प्राप्त जानकारी के अनुसार, घटना की सूचना थाना रहीमाबाद को 29 जुलाई की सुबह प्राप्त हुई। सूचना मिलते ही थाना स्थानीय पुलिस बल तत्काल मौके पर पहुंचा। घटनास्थल पर अमन दीक्षित का शव मिला, जिसे पुलिस ने कब्जे में लेकर पंचायतनामा भरवाते हुए पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह हत्या जमीन के बंटवारे और कब्जे को लेकर चल रहे विवाद का नतीजा है, जो काफी समय से मृतक के परिवार और आरोपी पक्ष के बीच चला आ रहा था।मृतक के परिजनों का आरोप है कि रात में सुनियोजित ढंग से अमन पर हमला किया गया। उन्होंने थाना रहीमाबाद में जो तहरीर दी, उसके आधार पर मुकदमा संख्या 123/2025, धारा 103(2) बीएनएस के तहत छह लोगों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया गया है। नामजद अभियुक्तों में पंकज, मंजू दीक्षित, नीरज दीक्षित, सपना दीक्षित, कल्पना दीक्षित और विमलेश दीक्षित शामिल हैं। सभी आरोपी वारदात के बाद से फरार बताए जा रहे हैं।थाना प्रभारी रहीमाबाद ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्चाधिकारियों को सूचित कर आवश्यक दिशा-निर्देश प्राप्त किए जा चुके हैं। हत्या की जांच को प्रभावी बनाने के लिए पुलिस द्वारा एक विशेष टीम का गठन किया गया है, जो आरोपियों की गिरफ्तारी और साक्ष्य संकलन की दिशा में तत्परता से कार्य कर रही है।घटना के बाद से गांव में तनाव का माहौल है, जिसे नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है। परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल है, वहीं आसपास के ग्रामीणों में भय और आक्रोश का माहौल देखा जा रहा है।पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही आरोपियों की गिरफ्तारी कर मामले का पर्दाफाश किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की जाएगी। हत्या की यह घटना न केवल क्षेत्र में सनसनी का विषय बन गई है, बल्कि एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन विवादों की भयावहता को उजागर करती है।
