
कानपुर : बिकरू कांड में एनकाउंटर में मारा गया दुर्दांत अपराधी विकास दुबे व दिवंगत पूर्व मंत्री कमला रानी वरुण समेत 173 लोगों के शस्त्र लाइसेंस की फाइलें गायब होने की जांच सीबीसीआइडी के सुपुर्द कर दी गई है। आठ वर्ष पूर्व विकास दुबे, दिवंगत पूर्व मंत्री कमल रानी वरुण समेत दो सौ से अधिक लोगों के शस्त्र लाइसेंस की फाइलें कानपुर देहात से कानपुर नगर स्थांनांतरित की गई थीं। दो जुलाई को बिकरू में सीओ समेत आठ पुलिसकर्मियों की हत्या के बाद विकास दुबे का नाम सामने आया और उसके नाम से शस्त्र लाइसेंस होने की जानकारी मिली तो फाइल खंगाली गई। पता चला कि फाइल रिकार्ड में है ही नहीं। इसके बाद जांच आगे बढ़ी तो सामने आया कि 173 फाइलें गायब हैं।
इस मामले में तत्कालीन असलहा अनुभाग के लिपिक विजय रावत के खिलाफ कोतवाली थाने में मुकदमा दर्ज हुआ था। मुकदमे में चार्जशीट भी दाखिल हो चुकी है। सीओ कोतवाली बृजेश नारायण सिंह ने बताया कि एसआइटी की संस्तुति के आधार पर शासन से मिले निर्देश के बाद शस्त्र लाइसेंस की फाइलें खोने की जांच अब सीबीसीआइडी को भेज दी गई है। इस प्रकरण से जुड़ी पत्रावलियां भी सीबीसीआइडी केसुपुर्द कर दी जाएंगी। विकास दुबे और उसके सहयोगियों का असलहा लाइसेंस बनाने में हुए खेल के मामले में एसआइटी की संस्तुति पर अब डीएम के पेशकार शैलेश और दो सेवानिवृत्त लिपिकों के खिलाफ एडीएम आपूर्ति डॉ.बसंत अग्रवाल को जांच दी गई है। जांच अधिकारी मंडलायुक्त ने नामित किया है।