
आतंकी हमले पर केंद्र की निष्क्रियता चिंताजनक: प्रमोद तिवारी
राज्यसभा सांसद ने विशेष सत्र बुलाने और जाति जनगणना की तिथि तय करने की मांग की
लखनऊ: राज्यसभा में विपक्ष के उपनेता प्रमोद तिवारी ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले को लेकर केंद्र सरकार की निष्क्रियता पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि घटना के बारह दिन बाद भी सरकार की ओर से कोई निर्णायक और कठोर कार्रवाई सामने न आना बेहद दुखद और चिंताजनक है। इस हमले में 26 निर्दोष परिवारों ने अपनों को खोया, लेकिन सरकार की ओर से कोई संवेदनशील या ठोस पहल अब तक नहीं दिखी।प्रमोद तिवारी ने कहा कि इस बर्बर और कायराना आतंकी हमले में निर्दोष नागरिकों की नृशंस हत्या हुई और पूरे देश में शोक और आक्रोश का माहौल है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब पूरा देश आतंकवाद की इस घटना को लेकर उद्वेलित है, तब सरकार की तरफ से कठोरतम जवाबी कार्रवाई में विलंब क्यों हो रहा है।कांग्रेस कार्यसमिति की हालिया बैठक का हवाला देते हुए तिवारी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने साफ कर दिया है कि वह आतंकवाद के खिलाफ किसी भी कठोर कदम में सरकार के साथ है। उन्होंने केंद्र से मांग की कि आतंकवाद की नर्सरी और इसके आका पर तत्काल और सख्त कार्रवाई की जाए।उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि इतने गंभीर हालातों के बीच भी प्रधानमंत्री राजनीतिक समीकरण साधने में व्यस्त हैं। केरल में एक उद्घाटन समारोह के दौरान मुख्यमंत्री और सांसद की साझा उपस्थिति को लेकर दिया गया प्रधानमंत्री का बयान प्रधानमंत्री पद की गरिमा के विपरीत है।तिवारी ने सवाल किया कि जब देश आतंकवाद के मुद्दे पर एकजुटता चाहता है, तब प्रधानमंत्री को सर्वदलीय बैठक की बजाए बिहार में राजनीतिक रैलियों को प्राथमिकता देना क्यों जरूरी लगा? उन्होंने मांग की कि संसद का विशेष सत्र बुलाकर दोनों सदनों में इस मुद्दे पर गंभीर चर्चा कराई जाए।
जातिगत जनगणना को लेकर भी तिवारी ने सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि सरकार ने जाति जनगणना की घोषणा तो कर दी, लेकिन अब तक न बजट का ऐलान हुआ और न तिथि तय हुई। यह दिखाता है कि सरकार गंभीर नहीं है। उन्होंने कहा कि यह विषय सामाजिक न्याय और देश की असली तस्वीर सामने लाने के लिए आवश्यक है, इसलिए इस पर भी विशेष सत्र में चर्चा जरूरी है।
