
मस्जिद-मदरसे बंद कर दो ये देश हिंदुओं का है;रघुराज सिंह
उत्तर प्रदेश के मंत्री रघुराज सिंह ने हाल ही में मुस्लिम समुदाय को लेकर एक ऐसा बयान दिया है, जिसने पूरे देश में तहलका मचा दिया है। उन्होंने कहा कि “जितना पढ़ा‑लिखा मुसलमान है, वह उतना बड़ा आतंकवादी है।” इसके साथ ही उन्होंने मस्जिदों और मदरसों को बंद करने की मांग भी की और यह तक कह दिया कि यह देश हिंदुओं का है। उनके इस बयान ने सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में जोरदार चर्चा शुरू कर दी है।
मंत्री रघुराज सिंह ने इस बयान में यह भी जोड़ा कि कुछ आतंकवादियों की पृष्ठभूमि *मदरसे और विश्वविद्यालयों* से जुड़ी हुई रही है। उन्होंने *अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU)* का उदाहरण देते हुए कहा कि वहाँ से कई आतंकवादी निकले हैं और इसलिए ऐसी संस्थाओं पर कड़ी निगरानी और जांच की जानी चाहिए। उनका तर्क है कि आतंकवाद और चरमपंथ की जड़ को काटने के लिए ऐसे कदम जरूरी हैं।
इसके अलावा, रघुराज सिंह ने आतंकवादियों की शिक्षा और प्रशिक्षण का उदाहरण देते हुए कहा कि ओसामा बिन लादेन जैसे आतंकवादी भी पढ़े‑लिखे थे, इसलिए पढ़ा‑लिखा मुसलमान अधिक खतरनाक हो सकता है। उन्होंने बुर्का और हिजाब जैसी चीजों पर भी प्रतिबंध लगाने की बात कही और कहा कि आतंकवादी पहचान छिपाने के लिए इन्हें इस्तेमाल करते हैं।
उनके इस बयान पर विपक्ष और समाज के कई वर्गों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। आलोचकों का कहना है कि पूरे समुदाय को एक ही नजरिए से देखना गलत है और इससे *सांप्रदायिक तनाव और सामाजिक असहमति* बढ़ सकती है। सोशल मीडिया पर लोग उनके बयान को भेदभावपूर्ण और संविधान के खिलाफ बता रहे हैं। वहीं कुछ लोग उनके तर्क को सुनते हुए कहते हैं कि उनका मकसद आतंकवाद रोकना है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि मंत्री का यह बयान चुनावी राजनीति और सुरक्षा को लेकर एक *सख्त संदेश* भी है। हालांकि, इसका असर मुस्लिम समुदाय पर नकारात्मक रूप में पड़ा है और कई लोग इसे धर्म की स्वतंत्रता पर हमला मान रहे हैं। इस पूरे विवाद ने यह सवाल फिर से उठाया है कि नेताओं को अपनी बात कहने में कितनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए और संवेदनशील मसलों पर सोच-समझकर ही बयान देना चाहिए।
इस पूरे घटनाक्रम से यह साफ हो गया है कि *धर्म, राजनीति और सुरक्षा* के मुद्दे आज भी समाज में बहुत संवेदनशील हैं। मंत्री रघुराज सिंह का बयान सिर्फ एक राजनीतिक बयान नहीं है, बल्कि यह पूरे समुदाय और समाज के बीच बहस का कारण बन गया है। अब सवाल यह उठता है कि क्या सरकार इस विवाद पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया देगी और भविष्य में ऐसे बयान देने से पहले नेताओं को चेतावनी दी जाएगी।