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कल्याण सिंह के निधन पर शोक व्यक्त किए जाने पर कुलपति की निंदा

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लखनऊ : उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के निधन पर शोक जताना अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के कुलपति प्रो. तारिक मंसूर को भारी पड़ गया। शोक संवेदना व्यक्त किए जाने की एएमयू के छात्रों ने निंदा की है। इसके विरोध में अब एएमयू परिसर में उर्दू और अंग्रेजी में पर्ची चस्पा किए गए हैं, जिनमें छात्रों की नाराजगी का जिक्र किया गया है। पर्चों में कल्याण सिंह को ढांचा विध्वंस का अभियुक्त बताया गया। साथ ही, लिखा है कि हिंदुस्तान के मुसलमानों में कल्याण सिंह के खिलाफ नाराजगी है।

हालांकि मंगलवार को विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस तरह के पर्चे हटवा दिए हैं। परिसर में चिपकाए गए पर्चे में कहा गया है कि विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा इस तरह शोक संवेदना व्यक्त करना भावनाओं को आहत करने वाला है। क्योंकि पूर्व में जो हुआ है वह किसी से छिपा हुआ नहीं है। यह अलीग बिरादरी की भावनाओं पर चोट करने जैसा है। कुछ लोगों ने इन पर्चों का फोटो खींचकर सोशल मीडिया पर भी डाल दिया है। एएमयू के छात्र संघ के पूर्व उपाध्यक्ष हमजा सुफियान ने बताया कि सर सैयद अहमद खान की विचारधारा के खिलाफ जाकर कल्याण सिंह के निधन पर संवेदना व्यक्त की गई। इसके विरोध में विश्वविद्यालय के विभिन्न स्थानों पर नोटिस लगाए गए हैं। इनमें लिखा है कि अपराधी के लिए प्रार्थना अक्षम्य अपराध है। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. तारिक मंसूर को अपना कर्तव्य निभाना चाहिए। अगर नेतागिरी करनी है तो अपना पद छोड़कर किसी अच्छी पार्टी में नेतागिरी करें। उन्होंने बाबरी मस्जिद की शहादत में अहम भूमिका निभाने वाले व्यक्ति के प्रति संवेदना व्यक्त की, जो बेहद गलत है।

इस मामले में विश्वविद्यालय के प्रॉक्टर प्रोफेसर वसीम अली कहते हैं कि विश्वविद्यालय परिसर में इस समय छात्र नहीं हैं। कैंपस खाली है। कुछ शरारती तत्वों द्वारा इस तरह के पर्चे दो-तीन जगह चिपकाए गए थे, जिसके विषय में जानकारी होने पर उनको तत्काल हटवा दिया गया। जहां तक सोशल मीडिया का संबंध है उस पर कोई भी व्यक्ति टिप्पणी कर सकता है। अगर वह कानून उल्लंघन के दायरे में आता है तो जांच की जाएगी। वहीं, कल्याण सिंह के निधन पर सपा और कांग्रेस के नेताओं द्वारा उन्हें श्रद्धांजलि नहीं देने पर भी सियासत शुरू हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह को अंतिम विदाई देने के लिए कांग्रेस और सपा नेताओं के नहीं आने पर भाजपा ने दोनों ही दलों पर निशाना साधा है। पिछड़े वर्ग के कद्दावर नेता कल्याण को श्रद्धांजलि नहीं देने के मुद्दे के जरिये भाजपा पिछड़े वोट बैंक को साधने में भी जुट गई है।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह, श्रम मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य और उन्नाव के सांसद साक्षी महाराज जैसे पिछड़ी जातियों के बड़े नेताओं ने कांग्रेस और सपा पर तुष्टिकरण और मुस्लिम वोट बैंक के लालच में कल्याण सिंह को श्रद्धांजलि नहीं देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सपा और कांग्रेस ने पिछड़े वर्ग का अपमान का किया है, 2022 में प्रदेश की जनता इसका जवाब देगी। उन्नाव के सांसद साक्षी महाराज ने कहा कि मुलायम सिंह यादव, अखिलेश यादव, सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने एक वर्ग विशेष के वोट बैंक और तुष्टिकरण की राजनीति के कारण कल्याण सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित नहीं की। कल्याण सिंह सरकार के कार्यकाल में अयोध्या में विवादित ढांचा टूटा था इसलिए कांग्रेस और सपा के नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित नहीं की। ये ओबीसी और दलित वर्ग का अपमान है।

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